लगातार बारिश से अंगूर की छंटाई का काम रुक गया है। किसानों को डर है कि इससे उन्हें नुकसान हो सकता है। अंगूर की छंटाई एक बहुत ज़रूरी काम है। यह तब किया जाता है जब अंगूर के पेड़ आराम कर रहे होते हैं। इस समय पेड़ की पुरानी और बेकार टहनियों को काटा जाता है। इससे नए और अच्छे फल लगते हैं। लेकिन इस साल लगातार बारिश हो रही है। इस वजह से किसान अपने खेतों में नहीं जा पा रहे हैं। ज़मीन गीली होने के कारण छंटाई का काम शुरू ही नहीं हो पा रहा है। किसानों का कहना है कि अगर छंटाई समय पर नहीं हुई तो अंगूर की फसल पर बुरा असर पड़ेगा। उन्हें डर है कि इस साल अंगूर की पैदावार कम होगी और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। एक किसान ने कहा, "बारिश की वजह से हम अंगूर के पेड़ों की छंटाई नहीं कर पा रहे हैं। यह हमारे लिए बहुत बड़ी समस्या है।" यह समस्या सिर्फ कुछ किसानों की नहीं है, बल्कि कई अंगूर उगाने वाले इलाकों में ऐसी ही स्थिति है। सरकार से गुहार लगाई जा रही है कि इस मामले में मदद की जाए।

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लगातार बारिश ने अंगूर की छंटाई का काम रोक दिया है। किसान चिंतित हैं कि इससे पैदावार कम होगी और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। पुणे जिले में अंगूर की खेती पर इसका गहरा असर पड़ा है। समय पर छंटाई न होने से फूलों और गुच्छों के बनने पर असर पड़ रहा है।

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पुणे जिले में लगातार हो रही बारिश ने अंगूर की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है। समय पर अंगूर की छंटाई (प्रूनिंग) का काम नहीं हो पा रहा है, जिससे पैदावार कम होने, लागत बढ़ने और निर्यात में नुकसान की चिंता सता रही है।

आमतौर पर अंगूर की छंटाई अगस्त और सितंबर में की जाती है। लेकिन इस साल यह काम कई हफ्तों से अटका हुआ है। पुणे जिले में करीब 4,000 हेक्टेयर में अंगूर की खेती होती है। किसानों का कहना है कि लगातार बारिश और नमी के कारण काम में देरी हो रही है। इससे फूलों और गुच्छों के बनने पर असर पड़ रहा है, जो पैदावार और गुणवत्ता के लिए बहुत ज़रूरी हैं। गीले मौसम के कारण फफूंदी (फंगल डिजीज) जैसे डाउनी मिल्ड्यू और पाउडरी मिल्ड्यू का खतरा भी बढ़ गया है।
बारामती के मुसवाड़ गांव के किसानों ने बताया कि अगर छंटाई समय पर नहीं हुई तो पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है। इससे पैदावार कम हो जाती है, फल की क्वालिटी खराब हो जाती है और बाज़ार में मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है। इस गांव के करीब 35 हेक्टेयर में फैले अंगूर के बागों पर इसका असर पड़ा है। बीमारियों का खतरा बढ़ने से बार-बार फफूंदीनाशक (फंगीसाइड) का छिड़काव करना पड़ रहा है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस देरी का असर अगले मार्केटिंग सीजन पर भी पड़ेगा। इससे उत्पादन क्षमता कम होगी और लागत बढ़ जाएगी। जिला कृषि अधिकारी संजय कचोले ने भी इस समस्या की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जो किसान जल्दी फसल चाहते हैं, वे आमतौर पर सितंबर के पहले हफ्ते में छंटाई शुरू कर देते हैं। लेकिन जुन्नार, इंदापुर और बारामती तहसीलों में लगातार बारिश के कारण यह शेड्यूल बिगड़ गया है। अगर अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रही तो छंटाई का काम और भी प्रभावित होगा।

पूरे इलाके के किसान इस मुश्किल मौसम के लिए तैयार हैं और उन्हें पैदावार को लेकर अनिश्चितता सता रही है। जुन्नार के ग्रेप्स फार्मर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र बिडवाई ने कहा कि जिले में ज़्यादातर अंगूर के बागों को मई से पर्याप्त धूप नहीं मिली है। उन्हें लगता है कि बागों की ग्रोथ उम्मीद के मुताबिक नहीं होगी। लगातार बारिश ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

बिडवाई, जिनके पास 10 एकड़ का अंगूर का बाग है, ने बताया कि कई किसान जो जल्दी फसल चाहते थे, वे खराब मौसम, खासकर पिछले कुछ दिनों की बारिश के कारण छंटाई शुरू नहीं कर पाए। यह उनके लिए एक मुश्किल सीजन होने वाला है।

जुन्नार के किसान कई सालों से खाड़ी और यूरोपीय बाजारों में अंगूर का निर्यात करते रहे हैं। बिडवाई ने बताया कि सिर्फ जुन्नार तहसील में अंगूर का कारोबार सालाना 200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का है। लेकिन अब कई किसान फल की क्वालिटी को लेकर चिंतित हैं। अगर क्वालिटी खराब हुई तो वे निर्यात नहीं कर पाएंगे। यह उनके लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान होगा।

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