Indias First Electric Truck Battery Swapping Station Inaugurated In Sonipat Nitin Gadkari Inaugurates
सोनीपत में इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग स्टेशन
नवभारत टाइम्स•
सोनीपत में भारत के पहले इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग स्टेशन का उद्घाटन हुआ। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने डीजल-पेट्रोल की जगह इलेक्ट्रिक और बायोफ्यूल अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ रहा है। आने वाला समय डीजल-मुक्त परिवहन का होगा। किसान अब ऊर्जा दाता भी बनेंगे।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोनीपत के गांव पांची गुजरान में भारत के पहले कमर्शल इलेक्ट्रिक ट्रक बैटरी स्वैपिंग और चार्जिंग स्टेशन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने ट्रांसपोर्टरों से डीजल-पेट्रोल छोड़कर इलेक्ट्रिक और बायोफ्यूल अपनाने की अपील की। गडकरी ने कहा कि भारत तेजी से वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ रहा है और आने वाला समय डीजल-मुक्त परिवहन का होगा। उन्होंने यह भी बताया कि किसान अब सिर्फ 'अन्नदाता' ही नहीं, बल्कि 'ऊर्जा दाता' भी बनेंगे, क्योंकि पराली, मक्का, गन्ना और कचरे से ईंधन तैयार होगा। इस पहल से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी।
सोनीपत के गांव पांची गुजरान में दिल्ली इंटरनैशनल कार्गो टर्मिनल प्राइवेट लिमिटेड (डीआईसीटी) में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगा रहा है। उन्होंने ट्रांसपोर्टरों से आग्रह किया कि वे डीजल और पेट्रोल जैसे पारंपरिक ईंधनों को छोड़कर इलेक्ट्रिक और बायोफ्यूल जैसे विकल्पों को अपनाएं। गडकरी ने विश्वास दिलाया, "जो मैं बोलता हूं, वो डंके की चोट पर करता हूं।" उनके साथ केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री श्री एचडी कुमारस्वामी भी मौजूद थे।गडकरी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत तेजी से वैकल्पिक ईंधन की ओर बढ़ रहा है और भविष्य में परिवहन पूरी तरह से डीजल-मुक्त होगा। उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात कही कि अब किसान सिर्फ 'अन्नदाता' नहीं रहेंगे, बल्कि 'ऊर्जा दाता' भी बनेंगे। इसका मतलब है कि पराली, मक्का, गन्ना और यहां तक कि कचरे से भी ईंधन बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के नागपुर और मध्य प्रदेश के जबलपुर में पराली का इस्तेमाल करके सड़कें बनाई जा रही हैं। देश में 50 लाख टन पराली से बायोफ्यूल बनाने का काम चल रहा है।
मंत्री ने यह भी दावा किया कि वे खुद बायो-एथेनॉल से चलने वाले वाहन से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने समझाया कि ऐसे वाहनों से न केवल प्रदूषण कम होता है, बल्कि किसानों की आय भी बढ़ती है। कृषि यंत्रों के लिए भी फ्लेक्सी इंजन विकसित किए जा रहे हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है। ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) तकनीक परिवहन क्षेत्र में क्रांति ला रही है। गडकरी ने बताया कि पिछले कुछ सालों में बैटरियों की कीमत में 50-60 फीसदी की कमी आई है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना और भी आसान हो गया है।
उन्होंने बताया कि सड़कों के बेहतर होने से देश की लॉजिस्टिक लागत में 6 फीसदी की कमी आई है और ट्रांसपोर्ट रेट अब सिंगल डिजिट में आ रहे हैं। इसका मतलब है कि सामान ढोने का खर्च कम हो गया है। बेहतर सड़कें ईंधन की बचत भी करा रही हैं। गडकरी ने भविष्य की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जल्द ही भारत जहाजों के लिए भी बायो-फ्यूल तैयार करेगा। इससे ईंधन के आयात में कमी आएगी और निर्यात में वृद्धि होगी, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत फायदेमंद होगा।
केंद्रीय मंत्री ने एनर्जी इन मोशन कंपनी की इस पहल को 'ऐतिहासिक' बताया। उन्होंने चिंता जताई कि भारत हर साल ईंधन खरीदने में लगभग 25 लाख करोड़ रुपये विदेशियों को दे देता है। अगर हम इस पैसे को वैकल्पिक ऊर्जा के माध्यम से बचा सकें, तो यह पैसा भारत के विकास में लगेगा। इससे हम 'विकसित भारत' के सपने को और तेजी से पूरा कर पाएंगे। उन्होंने दोहराया कि यह 25 लाख करोड़ रुपये का ईंधन आयात देश के लिए एक बड़ा बोझ है। अगर यह पैसा देश के विकास में लगे तो यह बहुत अच्छा होगा।