पीटीआई, मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक ने सोमवार को रुपये की सट्टेबाजी को रोकने के लिए लगाए गए सख्त नियमों में ढील देने का एलान किया है। 1 अप्रैल को जारी किए गए निर्देशों को वापस लेते हुए आरबीआई ने बैंकों को फिर से डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स (NDCs) की सुविधा देने की इजाजत दे दी है।
आरबीआई ने एक नोटिफिकेशन में कहा कि नए नियमों के तहत अब अधिकृत डीलर (बैंक) रेजिडेंट और नॉन-रेजिडेंट यूजर्स को रुपये से जुड़े नॉन-डिलीवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स (NDCs) फिर से ऑफर कर सकेंगे। हालांकि, अपनी ही संबंधित कंपनियों के साथ लेनदेन पर अब भी कुछ पाबंदियां रहेंगी। नए आदेश के तहत अब बैंक अपनी 'रिलेटेड पार्टीज' के साथ पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स को कैंसल कर पाएंगे या उन्हें आगे बढ़ा सकेंगे। साथ ही, कुछ खास तरह के बैक-टू-बैक ट्रांजेक्शन की भी इजाजत दी गई है।
बता दें कि पिछले दिनों जब रुपये पर डॉलर के मुकाबले बहुत ज्यादा दबाव था, तब आरबीआई ने सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए ये सख्त कदम उठाए थे। इससे कुछ दिन पहले केंद्रीय बैंक ने नेट ओपन पोजीशन (NOP) की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय कर दी थी। आरबीआई का मानना था कि कुछ बड़े खिलाड़ियों की वजह से बाजार में डॉलर की कृत्रिम कमी पैदा हो रही थी, जिसे रोकने के लिए ये कड़े नियम जरूरी थे।
नियमों में ढील: आरबीआई ने सट्टेबाजी रोकने के लिए 1 अप्रैल के निर्देशों को वापस लिया है।




