NBT रिपोर्ट, नई दिल्ली : अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर सहमति बन जाने से निर्यातकों ने राहत की सांस ली है, जो 50% टैरिफ का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टैरिफ 18% हो जाने से अधिकतर प्रतिस्पर्द्धी पड़ोसी देशों के मुकाबले भारत की स्थिति बेहतर हो गई है। हालांकि उन्होंने कहा कि समझौते की पूरी जानकारी सामने आने पर तस्वीर साफ होगी कि अलग-अलग सेक्टरों पर कितना अमेरिकी टैरिफ होगा। उन्होंने कहा कि ज्यादा टैरिफ के चलते कई अमेरिकी आयातक अपैरल, टेक्सटाइल्स, लेदर और फुटवियर जैसे सेक्टरों में ऑर्डर या तो टाल रहे थे या कड़ा मोलतोल कर रहे थे, लेकिन अब जो ऐलान हुआ है, उसके चलते स्थिति बदल गई है।
निर्यातकों के लिए गेमचेंजर
FIEO के प्रेसिडेंट एस सी रल्हन ने इसे 'फादर ऑफ ऑल डील्स' करार देते हुए कहा कि यह 'भारतीय निर्यातकों के लिए गेमचेंजर है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद किफायती होंगे और सभी सेक्टरों की एक्सपोर्ट ग्रोथ तेज होगी।' उन्होंने कहा कि 'टैरिफ घटने से निर्यातकों का अमेरिकी सप्लाई चेन से जुड़ाव मजबूत होगा। इससे यहां उत्पादन बढ़ाने में नया निवेश आएगा और रोजगार के मौके बढ़ेंगे।' रल्हन ने कहा कि अमेरिकी खरीदार अपैरल, टेक्सटाइल्स, लेदर और फुटवियर जैसे सेक्टरों में ऑर्डर आगामी महीनों में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
बेहतर स्थिति में आया भारत
FISME के महासचिव अनिल भारद्वाज ने कहा, 'टैरिफ बढ़ने की बात शुरू होते ही अमेरिकी खरीदारों ने पहली तिमाही में अडवांस ऑर्डर बढ़ा दिए थे, लेकिन उसके बाद ऑर्डर 50-60% तक घट गए, खासतौर से गारमेंट्स, लेदर और जेम्स एंड जूलरी सेक्टर में।' उन्होंने कहा, 'अब 18% टैरिफ के साथ बांग्लादेश, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्द्धी देशों के मुकाबले भारत बेहतर स्थिति में आ गया है। टेक्सटाइल्स में बांग्लादेश ने फायदा उठाया, लेकिन उसके पास भारत की तरह इसमें पूरी वैल्यू चेन नहीं है। भारतीय निर्यातकों के लिए अब स्थिति बेहतर होगी।'
काउंसिल ऑफ लेदर एक्सपोर्ट्स के पूर्व चेयरमैन आर के जालान ने कहा, 'इस डील की खबर आने के बाद अमेरिकी खरीदारों से मेरी बात हुई। वहां सेंटिमेंट बदल गया है। अब एग्जिक्यूटिव ऑर्डर का इंतजार है। टैरिफ घटने से लेदर एंड फुटवियर एक्सपोर्ट निश्चित तौर पर बढ़ेगा।'
FICCI चेयरमैन अनंत गोयनका ने कहा, 'टैरिफ 18% होने से दुनिया के सबसे बड़े इंपोर्ट मार्केट में भारतीय गुड्स का कॉम्पिटीटिवनेस काफी बेहतर हो जाएगा।' अमेरिका का 18% टैरिफ उसके MFN के अलावा होगा। भारत पर MFN टैरिफ अलग-अलग है लेकिन यह औसतन 10% है।








