NBT रिपोर्ट : यूनियन बजट ने भारत के अभी-अभी उभर रहे म्युनिसिपल बॉण्ड मार्केट को नई रफ्तार दी है। बजट में प्रस्ताव दिया गया है कि अगर कोई नगर निगम 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बॉण्ड जारी करता है, तो उसे 100 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दिया जाएगा।
क्या हैं म्युनिसिपल बॉण्ड?
ET के मुताबिक, म्युनिसिपल बॉण्ड एक तरह के कर्ज के दस्तावेज होते हैं। इन्हें नगर निगम सड़कों, पानी की सप्लाई, सफाई और शहरों के विकास जैसे कामों के लिए पैसा जुटाने के लिए जारी करते हैं। निवेशकों को इसमें शहर की कमाई से मिलने वाला एक स्थिर रिटर्न मिलता है।
क्यों बढ़ रहा आकर्षण?
म्युनिसिपल बॉण्ड पर मिलने वाला मुनाफा (yield) बड़ी कंपनियों के अच्छे बॉण्ड के बराबर होता है और स्टेट डिवेपलमेंट लोन (SDLs) से थोड़ा ज्यादा होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि म्युनिसिपल बॉण्ड फिलहाल AAA रेटिंग वाले सरकारी या कॉरपोरेट बॉण्ड के मुकाबले 0.75% से 1% तक ज्यादा रिटर्न दे रहे हैं। 8% से 8.5% के रिटर्न पर भी इनकी काफी मांग है और ये बॉण्ड आते ही बिक जाते हैं।
क्या है चुनौती
म्युनिसिपल बॉण्ड के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इनमें से ज्यादातर प्राइवेट प्लेसमेंट (चुनिंदा लोगों को बेचना) के जरिए लाए जाते हैं, जिसमें आम निवेशक हिस्सा नहीं ले पाते। एक और समस्या इन बॉण्ड्स की कीमत है।
क्या है समस्या?
बॉण्ड जारी होने की रफ्तार तो बढ़ी है, लेकिन इन्हें दोबारा बेचना अभी भी मुश्किल है। साल 2025 में म्युनिसिपल बॉण्ड्स की कुल ट्रेडिंग सिर्फ 175 करोड़ रुपये रही। निवेशक इन्हें खरीदकर मैच्योरिटी तक अपने पास रखना पसंद करते हैं, क्योंकि इनका साइज छोटा होता है और इन्हें बाजार में तुरंत बेचना आसान नहीं होता।
क्या बदलेगी सूरत?
बजट में 100 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन के ऐलान से यह स्थिति बदल सकती है। आने वाले समय में बाजार में इन बॉण्ड्स की खरीद-फरोख्त भी बढ़ेगी। एक्सपर्ट का कहना है कि इनमें जोखिम कम होता है।





