मॉनसून, वैश्विक हालात रहेंगे अहम

नवभारत टाइम्स

आरबीआई की मौद्रिक नीति में मॉनसून और वैश्विक हालात महत्वपूर्ण होंगे। थोक महंगाई के आंकड़े सीधे तौर पर नहीं देखे जाते, पर रिटेल महंगाई पर इनका असर पड़ेगा। खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। आने वाले महीनों में मॉनसून की चाल और ईरान-अमेरिका के समीकरणों पर ध्यान देना होगा।

monsoon and global situation important for rbis monetary policy
आरबीआई की मौद्रिक नीति में थोक महंगाई के आंकड़ों को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया जाता, लेकिन इन आंकड़ों का असर कुछ समय बाद खुदरा महंगाई पर जरूर पड़ता है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। आने वाले महीनों में मॉनसून की चाल और तेल-गैस की कीमतों को प्रभावित करने वाले ईरान और अमेरिका के बीच के समीकरणों सहित वैश्विक परिस्थितियां महंगाई को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति तय करते समय थोक महंगाई दर के आंकड़ों पर सीधे ध्यान नहीं देता है। हालांकि, यह समझना ज़रूरी है कि थोक महंगाई का असर कुछ समय बाद खुदरा महंगाई पर भी दिखाई देता है।
फिलहाल, खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। यह बढ़ोतरी आम आदमी की जेब पर भारी पड़ सकती है।

आने वाले महीनों में मॉनसून की चाल महंगाई को नियंत्रित करने में एक अहम कारक साबित होगी। अगर मॉनसून अच्छा रहा तो फसलों का उत्पादन बढ़ेगा, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें कम हो सकती हैं।

इसके अलावा, तेल और गैस की कीमतों के लिहाज से वैश्विक परिस्थितियों पर भी बारीकी से नजर रखनी होगी। ईरान और अमेरिका के बीच के समीकरणों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों पर पड़ता है, जो अंततः भारत की महंगाई को प्रभावित करता है।