डेरियों का सर्वे कर एक हफ्ते में दें रिपोर्ट: कमिश्नर

नवभारत टाइम्स

फरीदाबाद नगर निगम एरिया में अवैध डेरियों पर कार्रवाई की जाएगी। कमिश्नर ने अधिकारियों को एक हफ्ते में डेरियों का सर्वे करने का आदेश दिया है। पशु गोबर के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए कैटल डंग मैनेजमेंट पॉलिसी लागू की गई है। डेरी संचालकों को निगम में पंजीकरण कराना होगा। गोबर उत्पादकों से शुल्क भी लिया जाएगा।

crackdown on illegal dairies in faridabad commissioner seeks report within a week
फरीदाबाद नगर निगम ने शहर में चल रही अवैध डेयरियों पर नकेल कसने की कमर कस ली है। निगम कमिश्नर धीरेंद्र खड़गटा ने मेयर प्रवीण जोशी की अध्यक्षता में हुई बैठक में अधिकारियों को एक हफ्ते के अंदर डेयरियों का सर्वे करने का आदेश दिया है। इस काम के लिए सभी जॉइंट कमिश्नर को नोडल अधिकारी बनाया गया है। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि डेरी संचालक पशुओं के गोबर को खुले में, सड़कों पर, नालियों और सीवर लाइनों में बहा रहे हैं। इससे सीवर लाइनें जाम हो रही हैं, बदबू फैल रही है, बीमारियां बढ़ रही हैं और लोगों के स्वास्थ्य को खतरा हो रहा है। साथ ही, सीवर में गोबर से मीथेन गैस बनती है, जो सफाई कर्मचारियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने इस समस्या से निपटने के लिए 'कैटल डंग मैनेजमेंट पॉलिसी' लागू की है। इस पॉलिसी के तहत पशुओं के गोबर का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करना अब जरूरी हो गया है। इसका मतलब है कि जो भी लोग डेरी चलाते हैं या जिनके पास पशु हैं, उन्हें निगम में अपना पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण फॉर्म निगम की वेबसाइट पर उपलब्ध है। निगम खुद गोबर को इकट्ठा करने, उसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और वैज्ञानिक तरीके से उसका निपटान करने की व्यवस्था करेगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 'पोल्यूटर पे सिद्धांत' यानी जो प्रदूषण फैलाएगा, वही भुगतान करेगा, के आधार पर गोबर पैदा करने वालों से शुल्क भी वसूला जाएगा।
कमिश्नर ने साफ कहा है कि शहर में चल रही ऐसी सभी डेयरियों का सर्वे कराया जाना चाहिए। यह कदम शहर को साफ-सुथरा रखने और जन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। निगम का मानना है कि इस नई नीति से न केवल गंदगी और बीमारियों पर अंकुश लगेगा, बल्कि सीवर लाइनों की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। साथ ही, सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

यह सर्वे यह पता लगाने में मदद करेगा कि कितनी डेयरियां अवैध रूप से चल रही हैं और वे किस तरह से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं। इसके बाद निगम इन डेयरियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। निगम की यह पहल शहरवासियों के लिए एक राहत की खबर है, क्योंकि इससे उन्हें गंदगी और बीमारियों से मुक्ति मिलने की उम्मीद है। निगम ने लोगों से भी अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें और अपने पशुओं के गोबर का सही तरीके से निपटान करें।