NBT रिपोर्ट : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने निवेश के तरीकों, नीतियों और गाइडलाइंस की समीक्षा के लिए एक हाई-पावर कमिटी बनाने की तैयारी में है। संगठन की नजर अपने करीब 31 लाख करोड़ रुपये के विशाल फंड पर ज्यादा रिटर्न कमाने पर है। यह फंड देश के 30 करोड़ से ज्यादा मेंबर्स की गाढ़ी कमाई से बना है।
TOI के मुताबिक, पिछले हफ्ते हुई निवेश कमिटी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। इस दौरान इस बात पर गौर किया गया कि क्या शेयर बाजार में सिर्फ निफ्टी, सेंसेक्स और ईटीएफ (ETF) के बजाय अन्य जगहों पर भी निवेश किया जा सकता है। सरकार के एक प्रतिनिधि ने इस कमिटी को बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स और सरकारी विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।
अभी पैसा कहां लगता है?
अप्रैल 2015 के नियमों के मुताबिक, EPFO अपने नए फंड का 45-65% हिस्सा गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में, 20-45% कॉरपोरेट बॉन्ड्स और 5% तक शॉर्ट-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाता है। इक्विटी के लिए केवल 5-15% हिस्सा ही तय है। इसे इंडेक्स फंड्स के जरिए निवेश किया जाता है। 31 दिसंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, EPFO का करीब 88% पैसा गवर्नमेंट बॉण्ड्स में और 10.6% शेयर बाजार में लगा हुआ था।
मीटिंग में पेश एक रिपोर्ट में बताया गया कि रेयर अर्थ, रेलवे और डिफेंस जैसे उभरते हुए सेक्टरों में निवेश करना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा बैंकिंग, फाइनैंशल सर्विसेज, आईटी, एफएमसीजी (FMCG) और ग्लोबल इंडेक्स में पैसा लगाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। साथ ही 'वैल्यू स्टॉक्स' और कम उतार-चढ़ाव वाले शेयरों पर भी नजर रखने की बात कही गई।
इसकी जरूरत क्यों?
EPFO अपने मेंबर्स को सरकारी बॉण्ड्स से मिलने वाले ब्याज के मुकाबले ज्यादा सालाना ब्याज देता रहा है। अपनी कमाई बढ़ाने के लिए उसे निवेश के नए रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं। अगले महीने संगठन इस वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज दरों का ऐलान करने वाला है। RBI ने भी निवेश मैनेजमेंट और अकाउंटिंग के तरीकों को सुधारने के सुझाव दिए हैं।


