First Roza Of Ramadan Began With Sehri And Iftar Markets Showed Hustle
सहरी के साथ हुई पहले रोज़े की शुरुआत
नवभारत टाइम्स•
फरीदाबाद में रमजान का पवित्र महीना शुरू हो गया है। गुरुवार को पहले रोजे के साथ लोगों ने सहरी की। शाम को इफ्तार किया गया। मस्जिदों और घरों में खास रौनक रही। बाजारों में खजूर, टोपी, फेनी और सेवइयों की खूब खरीदारी हुई। हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने मिलकर खरीदारी की। मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की गई।
फरीदाबाद में गुरुवार को माह-ए-रमजान की शुरुआत हुई। सुबह करीब 5:38 बजे सहरी के साथ रोजेदारों ने अपने उपवास की शुरुआत की, और शाम करीब 6:15 बजे इफ्तार किया गया। इस पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही मस्जिदों और घरों में खास रौनक देखने को मिली। रमजान को इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है, जिसमें मुस्लिम समाज के लोग अल्लाह की इबादत करते हैं और जरूरतमंदों की मदद पर विशेष ध्यान देते हैं। ऊंचा गांव जामा मस्जिद के मौलाना जमालुद्दीन ने बताया कि यह महीना संयम, त्याग और इंसानियत का पैगाम देता है।
रमजान के पहले रोजे के साथ ही बाजारों में भी खास चहल-पहल देखी गई। लोग खजूर, टोपी, फेनी, सेवइयां और दीनी किताबों की खरीदारी करते नजर आए। खजूर से रोजा खोलना शुभ माना जाता है, इसलिए बाजार में खजूर और सेवइयों की खूब खरीदारी हुई। मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में नमाजी शामिल हुए।मस्जिदों के पास रमजान के पहले दिन काफी भीड़ देखने को मिली। महंगाई के बावजूद लोग खुशी और उत्साह के साथ खरीदारी कर रहे थे। हाफिज मोहम्मद शाहिद ने बताया कि रमजान के पवित्र महीने में लोग खजूर, टोपी, फेनी, सेवइयां और दीनी किताबें खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि खजूर 150 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक बेचा जा रहा है, जबकि टोपी 50 से 300 रुपये तक मिल रही है। बाबू खान सिद्दीकी और मोहम्मद आमिर ने बताया कि हिंदू और मुस्लिम दोनों समाज के लोगों ने मिलकर खजूर की अच्छी खरीदारी की है। पहले ही दिन खूब बिक्री हुई।
मौलाना जमालुद्दीन ने बताया कि रमजान का यह पवित्र महीना लोगों को संयम, त्याग और इंसानियत का संदेश देता है। यह नेकी और सब्र का महीना है। उन्होंने यह भी बताया कि सुबह सहरी के बाद शाम को करीब 6:15 बजे इफ्तार किया गया। इसके लिए लोग पहले ही तैयारी में जुट गए थे। शाम को रोजा खोलकर अल्लाह का शुक्रिया अदा किया गया। शहर की कई मस्जिदों में रोजा इफ्तार की दावतें भी हुईं।
रमजान का महीना सिर्फ इबादत का ही नहीं, बल्कि समाज में भाईचारा और एकजुटता का भी प्रतीक है। बाजारों में हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों को एक साथ खरीदारी करते देखना इस बात का प्रमाण है। खजूर, जो कि रोजा खोलने का एक पारंपरिक तरीका है, की खरीदारी में सभी की भागीदारी देखी गई। यह दिखाता है कि कैसे यह पवित्र महीना सभी के लिए खुशियां और एकजुटता लेकर आता है। इस महीने में दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है, और लोग जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आते हैं।