पहला रोज़ा रखकर पाक महीने में इबादत का सिलसिला शुरू

नवभारत टाइम्स

रमजान का पाक महीना गुरुवार को पहले रोजे के साथ शुरू हुआ। अकीदतमंदों ने सुबह सहरी कर रोजा रखा। फज्र की अजान से इबादत का सिलसिला शुरू हुआ। शाम को इफ्तार किया गया। घरों और मस्जिदों में पांच वक्त की नमाज अदा की गई। आज रमजान का पहला जुमा है।

first roza of ramadan holy month of worship begins special arrangements for friday prayer
गुड़गांव में रमजान का पाक महीना गुरुवार को पहले रोजे के साथ शुरू हो गया। अकीदतमंदों ने सुबह 5:38 बजे से पहले सहरी खाकर रोजा रखा। फज्र की अजान के साथ इबादत का दौर शुरू हुआ, जो पूरे दिन चला। शाम 6 बजकर 17 मिनट पर अजान के साथ इफ्तार किया गया। घरों और मस्जिदों में पांचों वक्त की नमाज अदा की गई। पहले रोजे को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा गया। आज रमजान का पहला जुमा है, जिसके लिए शहर की 14 मस्जिदों में खास इंतजाम किए गए हैं।

अनुमान है कि करीब एक लाख लोग जुमे की नमाज अदा करेंगे। दोपहर 12 बजकर 35 मिनट के बाद जुमे की नमाज शुरू होगी। भीड़ को देखते हुए कई मस्जिदों में नमाज 4 से 5 बार अलग-अलग शिफ्ट में कराई जाएगी। मुफ्ती मोहम्मद सलीम कासमी ने बताया कि रमजान के पहले दिन पांच वक्त की नमाज अदा की गई और इबादत का सिलसिला शुरू हो गया है। रोजेदारों में खास उत्साह देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा, "जुमे की नमाज के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन से विशेष मांग की गई है।"
रमजान का महीना अल्लाह की इबादत और नेकियों का महीना होता है। इस महीने में मुसलमान सुबह से शाम तक भूखे-प्यासे रहकर रोजा रखते हैं। रोजा रखने से इंसान को सब्र और अल्लाह का अहसास होता है। सहरी का मतलब है रोजा रखने से पहले सुबह जल्दी उठकर खाना खाना। वहीं, इफ्तार का मतलब है रोजा खोलने के लिए शाम को खाना खाना। फज्र की अजान सुबह की नमाज का समय बताती है। जुमे की नमाज मुसलमानों के लिए हफ्ते में एक बार होने वाली खास नमाज है, जो जुमे के दिन दोपहर में पढ़ी जाती है।