Noida Garbage Strike City Becomes Garbage Dump Residents Distressed By Stench And Filth
हड़ताल से कूड़ा-कूड़ा हुआ शहर सड़कों पर लगा कचरे का अंबार
नवभारत टाइम्स•
नोएडा शहर कूड़े की बदबू और गंदगी से जूझ रहा है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाले वेंडरों की अचानक हुई हड़ताल ने सफाई व्यवस्था ठप कर दी है। करोड़ों का शुल्क चुकाने के बावजूद घरों से कूड़ा नहीं उठ रहा है। निवासी मजबूरी में सड़कों पर कचरा फेंक रहे हैं। प्रमुख सेक्टरों की गलियां डंपिंग ग्राउंड बन गई हैं।
नोएडा, जो देश के सबसे व्यवस्थित शहरों में गिना जाता है, आज कूड़े की बदबू और गंदगी से जूझ रहा है। डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाले वेंडरों की अचानक हड़ताल ने पूरे शहर की सफाई व्यवस्था को ठप कर दिया है। करोड़ों रुपये मेंटेनेंस और कचरा शुल्क चुकाने के बावजूद लोगों के घरों से कूड़ा नहीं उठ रहा है, जिसके कारण मजबूर होकर निवासी सड़कों और मुख्य मार्गों पर कचरा फेंक रहे हैं। शहर के प्रमुख सेक्टरों की गलियां अब कूड़ेदान बन गई हैं।
नोएडा प्राधिकरण ने शहर से कूड़ा उठाने का ठेका मैसर्स एजी. एनवायरो प्रा.लि. नाम की कंपनी को दिया है। सेक्टर-19 आरडब्ल्यूए के महासचिव ने प्राधिकरण और कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक-दो साल से कंपनी प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच भारी मतभेद चल रहे हैं। कंपनी और प्राधिकरण के अधिकारियों का कर्मचारियों पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। जब भी कर्मचारियों का मन होता है, वे बिना किसी पूर्व सूचना के हड़ताल पर चले जाते हैं।आरडब्ल्यूए अध्यक्ष आरसी गुप्ता और कोषाध्यक्ष राम कुमार शर्मा ने बताया कि सेक्टर-19 जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में, जहां ज्यादातर मकान तीन मंजिला हैं, सिर्फ एक दिन कूड़ा न उठने से घरों में कचरे का पहाड़ खड़ा हो जाता है। सड़कों पर फैली बदबू से महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। निवासियों में गुस्सा है कि वे नियमित रूप से सफाई शुल्क का भुगतान करते हैं, फिर भी उन्हें निजी कंपनी की मनमानी और कर्मचारियों की हड़ताल का खामियाजा क्यों भुगतना पड़ रहा है। क्या प्राधिकरण के पास ऐसी स्थितियों के लिए कोई प्लान-बी नहीं है?
यह स्थिति नोएडा की साफ-सुथरी छवि पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है। करोड़ों रुपये के ठेके और मेंटेनेंस शुल्क के बावजूद, शहर की सफाई व्यवस्था का यह हाल होना चिंताजनक है। निवासियों का कहना है कि वे समय पर अपना टैक्स भरते हैं और बदले में उन्हें एक साफ-सुथरा शहर मिलना चाहिए। लेकिन, कंपनी और कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद का असर सीधे तौर पर आम जनता पर पड़ रहा है।
सेक्टर-19 आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि कंपनी प्रबंधन कर्मचारियों की मांगों को अनसुना कर रहा है, जिसके कारण यह हड़ताल हुई है। उन्होंने प्राधिकरण से मांग की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और जल्द से जल्द सफाई व्यवस्था को बहाल करवाए। अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो शहर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। यह देखना बाकी है कि नोएडा प्राधिकरण इस गंभीर समस्या का समाधान कैसे निकालता है और शहर को फिर से स्वच्छ और व्यवस्थित कैसे बनाता है।