नोएडा के स्क्रैप कारोबारी की कंपनी से जुड़ी मिलीं 335 बोगस फर्में
नवभारत टाइम्स•
नोएडा में स्क्रैप कारोबारियों का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इन्होंने 335 बोगस फर्मों के जरिए 1000 करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी चोरी की। फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दुरुपयोग किया गया। उत्तराखंड के जसपुर को फर्जी फर्मों का हब बनाया गया। इस मामले में कई गिरफ्तारियां हुई हैं और मास्टरमाइंड फरार है। जांच जारी है।
नोएडा: उत्तर प्रदेश के खजाने को सबसे ज्यादा जीएसटी देने वाले गौतमबुद्ध नगर में एक बड़ा टैक्स चोरी का मामला सामने आया है। स्क्रैप कारोबारियों ने फर्जी फर्मों का जाल बिछाकर 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की जीएसटी चोरी की। इसमें मुख्य रूप से फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत इस्तेमाल किया गया। जीएसटी विभाग की जांच में एके इंटरप्राइजेज नाम के ग्रुप से जुड़ी 335 फर्जी फर्मों का एक बड़ा नेटवर्क खुला है। इन फर्मों के जरिए करीब 989 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी क्लेम किया गया और यह पैसा पूर्वांचल के कई जिलों के खातों में भेज दिया गया।
स्क्रैप कारोबारियों ने नोएडा से लेकर उत्तराखंड के जसपुर तक में सबसे ज्यादा फर्जी फर्मों को रजिस्टर कराया। उत्तराखंड के जसपुर को तो फर्जी फर्मों का अड्डा बना दिया गया था। यहीं से फर्जी बिल बनाकर करोड़ों रुपये का लेन-देन दिखाया जाता था। यह गिरोह सिर्फ यूपी में ही नहीं, बल्कि दिल्ली, पंजाब और दूसरे राज्यों में भी सक्रिय था। जांच में पता चला कि यह ग्रुप फर्जी कागजातों के आधार पर पंजाब के गोविंदगढ़ में स्क्रैप की सप्लाई दिखाता था।पिछले 15 दिनों में जीएसटी की टीम ने एनसीआर से पंजाब जा रही आधा दर्जन से ज्यादा लोहे के स्क्रैप से लदी गाड़ियों को रोका। इन गाड़ियों के ई-वे बिल में गड़बड़ी पाई गई। जब ड्राइवरों से पूछताछ की गई तो पता चला कि ये गाड़ियां नोएडा के एक ग्रुप की हैं। इस ग्रुप ने दिल्ली में भी पांच से ज्यादा फर्मों को रजिस्टर कराया था।
जीएसटी के प्रमुख सचिव के आदेश पर बनी एसआईटी इस मामले की जांच कर रही है। अब तक आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड शाहिद अभी भी फरार है। एसआईटी अब उन लोगों के खातों की जांच कर रही है, जहां चोरी का पैसा ट्रांसफर किया गया था। अधिकारी नोएडा के स्क्रैप कारोबारियों की पूरी जानकारी जुटा रहे हैं। साथ ही दिल्ली के अधिकारियों से रिकॉर्ड मंगवाया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दूसरे राज्यों में कितनी फर्मों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।
यह पूरा मामला फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के दुरुपयोग से जुड़ा है। आईटीसी एक ऐसी सुविधा है जिससे व्यापारी अपने द्वारा चुकाए गए टैक्स को आगे बेचे जाने वाले माल पर लगने वाले टैक्स में से घटा सकते हैं। लेकिन इस गिरोह ने फर्जी बिलों का इस्तेमाल करके बिना माल खरीदे ही आईटीसी का फायदा उठाया और सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। इस तरह की टैक्स चोरी से देश के खजाने को भारी नुकसान होता है। एसआईटी इस गिरोह के बाकी सदस्यों को पकड़ने और चोरी की गई रकम को वसूलने के लिए तेजी से काम कर रही है।