प्रदेश में गाय का परिवहन अपराध नहीं: हाई कोर्ट

नवभारत टाइम्स

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गोवंश परिवहन को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट के अनुसार, प्रदेश के अंदर गाय ले जाना अपराध नहीं है। वहीं, बलिया से मऊ गाय ले जा रहे वाहन को जब्त करने का जिलाधिकारी का आदेश अवैध करार दिया गया है।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गोवध निरोधक कानून के तहत एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश के बाहर गाय या गोमांस ले जाना अपराध है, लेकिन प्रदेश के अंदर इसका परिवहन करना अपराध नहीं माना जाएगा। इस फैसले के साथ ही, बलिया के जिलाधिकारी द्वारा गाय खरीदकर मऊ ले जा रहे वाहन को जब्त करने का आदेश भी कोर्ट ने रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति एससी शर्मा की एकलपीठ ने मंजीत कुमार मौर्य की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

इस मामले में, बलिया से गाय खरीदकर मऊ ले जा रहे एक वाहन को जिलाधिकारी बलिया ने जब्त कर लिया था। लेकिन हाई कोर्ट ने इस आदेश को गलत ठहराते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट का मानना है कि गोवध निरोधक कानून के तहत प्रदेश के अंदर गायों का परिवहन करना कोई अपराध नहीं है। यह फैसला उन लोगों के लिए राहत भरा हो सकता है जो प्रदेश के भीतर पशुओं का परिवहन करते हैं।
वहीं, एक अन्य मामले में, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ प्रयागराज की एमपी /एमएलए कोर्ट ने परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल की तरफ से दाखिल परिवाद पर विशेष न्यायाधीश योगेश जैन ने दिया है। आरोप है कि मंत्री राजभर ने 28 दिसंबर 2025 को बलिया में मीडिया से बात करते हुए वर्ष 2012 से 2017 तक सपा शासनकाल में एसडीएम की नियुक्तियों को लेकर गलत और भ्रामक बयान दिए थे।

कोर्ट के अनुसार, मंत्री के इस बयान से पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और एक खास समुदाय के बीच दुश्मनी फैलाने की कोशिश की गई। कोर्ट ने परिवादी का बयान दर्ज करने के लिए 24 मार्च की तारीख तय की है। इस मामले में आगे की सुनवाई 24 मार्च को होगी।