The Wonderful Confluence Of Silence And Music The Body Became Music The Soul Was Purified
मौन का वह प्रयोग, जिसने शरीर को संगीत बनाया
Contributed by: शीतल वर्मा|नवभारत टाइम्स•
एक ध्यान सत्र ने लेखक को समय और स्थान से परे की यात्रा पर ले गया। एनिग्मा के संगीत ने शरीर को एक नए अनुभव से भर दिया। यह अनुभव परम आनंद का था जिसने चेतना को जागृत किया। तर्क से परे, एक सहज स्पष्टता का अनुभव हुआ।
23 फरवरी 2026 की सुबह एक आम सुबह नहीं थी, बल्कि एक नए अनुभव की शुरुआत थी। एक व्यक्ति ने एनिग्मा (Enigma) के गाने 'The Child in Us' को सुनकर ध्यान लगाया। इस ध्यान से उन्हें एक गहरा, अद्भुत आनंद मिला, जो सामान्य सुख से कहीं बढ़कर था। उन्होंने महसूस किया कि संगीत और ध्यान के मेल से आत्मा का शुद्धिकरण होता है और वे खुद संगीत बन गए।
यह खास अनुभव 23 फरवरी 2026 की सुबह ध्यान सत्र के दौरान हुआ। व्यक्ति पिछले कुछ समय से मौन और शून्यता का अभ्यास कर रहे थे। उस दिन, मन में एक पुराने प्रयोग को दोहराने की इच्छा जगी। उन्होंने एनिग्मा (Enigma) का मशहूर गाना 'The Child in Us' लूप पर लगाया और आंखें बंद कर लीं। उन्हें अंदाजा नहीं था कि अगले 30 मिनट उन्हें समय और स्थान से परे एक ऐसी यात्रा पर ले जाएंगे, जहां शब्दों का कोई मतलब नहीं रहेगा, सिर्फ एक खास तरह का कंपन महसूस होगा।ध्यान के दौरान जो आनंद मिला, उसे सिर्फ 'सुख' कहना उस अनुभव का अपमान होगा। यह एक गहरा, स्थिर ' परम आनंद ' था। इस आनंद ने उनके पूरे शरीर को नई जान दे दी। गाने की हर धुन के साथ उनका मन खिल रहा था। उनके शरीर में इतनी सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ, जैसे सालों से बुझा हुआ दीया अचानक किसी दिव्य लौ से जल उठा हो।
ध्यान की गहराई में उतरने पर, उन्हें अपने भौतिक शरीर का एहसास ही नहीं रहा। संगीत की लहरों में बहते हुए, उनके भीतर ज्ञान के बंद दरवाजे खुलने लगे। यह बोध की ऐसी अवस्था थी, जहां तर्क की कोई जगह नहीं थी। सब कुछ बहुत सहज और स्पष्ट था। उन्हें लगा कि उनके अंदर का वह मासूम बच्चा, जिसे दुनिया की भागदौड़ में कहीं दबा दिया गया था, अचानक जाग गया है। वह बच्चा पूरे हक के साथ इस अनंत ब्रह्मांड से सीधे बात कर रहा था। उस पल में, ब्रह्मांड की विशालता और अपनी छोटी सी हस्ती के बीच का फर्क मिट गया।
यह प्रयोग सिर्फ सफल ही नहीं हुआ, बल्कि इसने एक शाश्वत सत्य की याद दिलाई। जब संगीत और ध्यान मिलते हैं, तो वे सिर्फ मानसिक शांति ही नहीं देते, बल्कि आत्मा को पूरी तरह से शुद्ध कर देते हैं। उस दिन, वह व्यक्ति सिर्फ मौन का गवाह नहीं था, बल्कि वह खुद संगीत बन गया था। यह अनुभव बताता है कि कैसे कला और आत्म-साधना मिलकर हमें एक उच्च स्तर के अनुभव तक पहुंचा सकते हैं। यह दिखाता है कि हमारे भीतर छिपी हुई क्षमताएं और आनंद संगीत और ध्यान के माध्यम से जागृत हो सकते हैं। यह एक ऐसी यात्रा थी जिसने उन्हें खुद से और ब्रह्मांड से गहराई से जोड़ा।