जैश ने बताया पाकिस्तान का सच

नवभारत टाइम्स

पाकिस्तान समर्थित जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर और डिप्टी सैफुल्लाह कसूरी के संदेशों से पाकिस्तान की सेना, आईएसआई और आतंकी नेटवर्क के बीच गहरी साझेदारी का पता चलता है। यह भारत के खिलाफ प्रॉक्सी युद्ध और मनोवैज्ञानिक खेल का हिस्सा है। पाकिस्तान भारत को रोकने और दुनिया में दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश कर रहा है।

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पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर और उसके डिप्टी सैफुल्लाह कसूरी के हालिया ऑडियो और वीडियो संदेशों ने भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अजहर का दावा है कि जैश ने हजारों आत्मघाती हमलावर तैयार कर लिए हैं जो भारत पर हमला करने के लिए तैयार हैं, जबकि कसूरी ने पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए सैनिकों के जनाजे में नमाज पढ़ने की बात कही। इन संदेशों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के समर्थक अकाउंट्स द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया जाना, पाकिस्तानी सेना, ISI और आतंकी नेटवर्क के बीच गहरी सांठगांठ को दर्शाता है। कसूरी और अजहर का सार्वजनिक सभाओं में भाषण देना इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर कट्टरपंथियों को तैयार किया जा रहा है और सेना उन्हें संरक्षण दे रही है। यह सब भारत को चुनौती देने या मनोवैज्ञानिक खेल खेलने की मंशा से किया जा रहा है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर में जैश को हुई भारी क्षति के बाद। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञ इसे खोखली धमकी मान रहे हैं, जो संगठन की हताशा को दर्शाती है। फिर भी, सुरक्षा एजेंसियां ऑडियो की प्रामाणिकता की जांच कर रही हैं। यह घटनाक्रम पाकिस्तान की प्रॉक्सी वॉर की रणनीति का हिस्सा है, जो भारत से सीधे युद्ध में हार के बाद अपनाई गई है। पाकिस्तान धार्मिक पार्टियों का इस्तेमाल करके भारत में 'मुजाहिदीन' भेजता रहा है, और आतंकवाद को अपनी ताकत का जरिया बना लिया है। इस प्रॉक्सी वॉर का मकसद भारत को रोकना, मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ना और कश्मीर पर अपने कब्जे के प्रोपेगेंडा को फैलाना है।

मसूद अजहर के ऑडियो और सैफुल्लाह कसूरी के वीडियो संदेशों ने एक बार फिर भारत की सुरक्षा पर चिंताएं बढ़ा दी हैं। अजहर का यह दावा कि जैश-ए-मोहम्मद ने हजारों आत्मघाती हमलावर तैयार कर लिए हैं, जो भारत पर हमला करने के लिए एकदम तैयार हैं, कोई छोटी बात नहीं है। यह सीधे तौर पर भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। वहीं, कसूरी का यह बताना कि पाकिस्तानी सेना ने उसे ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए अपने सैनिकों के जनाजे में आखिरी नमाज के लिए बुलाया था, यह दिखाता है कि जैश-ए-मोहम्मद और पाकिस्तानी सेना के बीच कितने गहरे संबंध हैं। यह कोई संयोग नहीं है कि इन ऑडियो और वीडियो संदेशों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के समर्थक अकाउंट्स ने सोशल मीडिया पर खूब फैलाया है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि पाकिस्तानी सेना, ISI और आतंकी नेटवर्क के बीच एक संस्थागत साझेदारी है, यानी वे मिलकर काम करते हैं।
एक और चिंताजनक बात यह है कि कसूरी ने एक स्कूल परिसर में सैकड़ों बच्चों के सामने भाषण दिया। यह भी बताया जा रहा है कि अजहर भी किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित कर रहा था। इसका सीधा मतलब यह निकलता है कि पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर कट्टरपंथी तैयार करने का काम चल रहा है और इसमें सेना का पूरा संरक्षण है। यह बच्चों को कट्टरपंथी विचारधारा में ढालने का एक खतरनाक खेल है, जो भविष्य में और भी बड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है।

अब सवाल यह उठता है कि जैश के सरगनाओं के इन संदेशों के पीछे की असली मंशा क्या है? क्या वे सिर्फ भारत को चुनौती देना चाहते हैं, या यह एक मनोवैज्ञानिक खेल है? ऑपरेशन सिंदूर में जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी ढांचा बुरी तरह ध्वस्त हो गया था। मसूद अजहर के परिवार के कुछ सदस्यों सहित कई बड़े आतंकी मारे गए थे। ऐसे में, एक नया आतंकी ढांचा खड़ा करना और अपना नेटवर्क फिर से बनाना जैश के लिए बहुत मुश्किल लग रहा है। इस मुश्किल घड़ी में, मसूद अजहर के ऑडियो में उसका चुनौतीपूर्ण अंदाज यह दिखाता है कि वह अपनी ताकत का बढ़ा-चढ़ाकर बखान कर रहा है। वह दावा करता है कि अगर उसके समर्थकों की असली संख्या सामने आ जाए, तो दुनिया भर के मीडिया में हलचल मच जाएगी।

लेकिन, रक्षा विशेषज्ञ इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि यह सब एक खोखली धमकी से ज्यादा कुछ नहीं है। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश-ए-मोहम्मद को जो गहरी चोट पहुंची है, उसे देखते हुए यह मानना ज्यादा सही होगा कि मसूद अजहर का ऑडियो उसके आतंकी संगठन की ताकत को दिखाने वाला संदेश नहीं, बल्कि एक झूठी धमकी है। जब उसका खुद का होना ही संदिग्ध है, तो फिर यह ऑडियो भी संदिग्धता की श्रेणी में ही आएगा। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां अभी भी ऑडियो की आवाज के नमूनों और मेटाडेटा का विश्लेषण कर रही हैं ताकि किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सके।

पाकिस्तान की यह प्रॉक्सी वॉर की रणनीति कोई नई नहीं है। साल 1971 तक पाकिस्तान कई बार भारत से सीधे भिड़ा और हर बार हार का सामना करना पड़ा। जब उसने देख लिया कि वह भारत से सीधे युद्ध में नहीं जीत सकता, तब उसने प्रॉक्सी युद्ध का सहारा लिया। उसने प्रशिक्षित 'मुजाहिदीन' को भारत में भेजने की योजना बनाई। इसके लिए उसने धार्मिक पार्टियों, जैसे - मरकज दावा-अल-इरशाद, जमात-इ-इस्लामी, सिपह-ए-सहाबा, जैश-ए-मोहम्मद का सहारा लिया। जनरल जिया ने इन नीतियों के साथ-साथ धार्मिक उन्माद को इस हद तक बढ़ाया कि उन्हें 'वर्दी वाला मुल्ला' कहा जाने लगा।

'गन्स एंड येलो रोजेज' नामक किताब में पामेला कॉन्स्टेबल ने पाकिस्तान में खड़े हो रहे आतंकी संगठनों, विशेषकर लश्कर-ए-तैयबा की मानसिकता पर लिखा है, "हमारी हार्दिक इच्छा है कि भारतीयों के खिलाफ जिहाद में मरना है, ताकि हम जन्नत में अपना स्थान बना सकें।" तभी से यह सिलसिला जारी है। और शायद तब तक रुकेगा भी नहीं, जब तक पाकिस्तान का अस्तित्व है, क्योंकि उसने आर्मी और आतंकवाद को ही अपनी ताकत बना रखा है।

प्रॉक्सी वार के जरिए पाकिस्तान तीन तरह के फायदे उठाना चाहता है। पहला उद्देश्य है भारत को रोकना। भारत आज दुनिया की उभरती हुई ताकत है और ग्लोबल साउथ में लीडरशिप का दावेदार है। पाकिस्तान चाहता है कि भारत उसके रचे प्रॉक्सी वॉर में उलझा रहे और उसकी तरक्की रुक जाए। पाकिस्तान का दूसरा उद्देश्य है मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ना। इसके जरिए वह भारत में डर और अशांति फैलाना चाहता है, जिससे लोगों का सरकार और संस्थाओं पर से भरोसा टूटे और मानवीय क्षति हो।

पाकिस्तान का अगला मकसद इस प्रोपेगेंडा को दुनिया में फैलाना है कि कश्मीर पर भारत ने जबरन कब्जा किया हुआ है और उसके खिलाफ मुजाहिदीन संघर्ष कर रहे हैं। इस काम में उसे समय-समय पर चीन और अमेरिका जैसे देशों से भी ऊर्जा मिलती रहती है, जो उसे समर्थन देते हैं या कम से कम उसकी बातों को अनसुना नहीं करते। बहरहाल, पाकिस्तान से आए ये ऑडियो-वीडियो जैश-ए-मोहम्मद के बिखरे हुए ढांचे को फिर से समेटने, उसे ताकत देने और उसके नेटवर्क को जिंदा करने की कोशिश का एक हिस्सा प्रतीत होते हैं। फिर भी, इन्हें पूरी तरह से खारिज करना सही नहीं होगा, क्योंकि ये पाकिस्तान की नापाक हरकतों का एक संकेत हैं। सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत है।