अभी क्या है सिस्टम?

नवभारत टाइम्स

एनपीएस में निवेश बाजार से जुड़ा है। रिटायरमेंट पर आप एनपीएस से 80% तक पैसा निकाल सकते हैं। बाकी 20% से पेंशन प्लान लेना होगा। वहीं, सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन योजना में निश्चित भुगतान की गारंटी है। यह योजना 25 साल की सेवा पर मूल वेतन का 50% पेंशन देती है। कम सेवा पर भी आनुपातिक भुगतान मिलेगा।

nps vs unified pension scheme which system is better for your retirement
एनपीएस ( NPS ) में मिलने वाला पैसा शेयर बाज़ार से जुड़ा होता है। NPS से बाहर निकलते समय, गैर-सरकारी लोग अपने जमा पैसे का 80% तक निकाल सकते हैं। लेकिन 20% पैसे से उन्हें पेंशन प्लान खरीदना ज़रूरी होता है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम में पेंशन की गारंटी है। इस स्कीम के तहत, अगर कोई कर्मचारी 25 साल नौकरी करता है, तो उसे रिटायरमेंट से ठीक पहले के 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50% पेंशन के तौर पर मिलेगा। अगर सेवा अवधि 25 साल से कम है, तो पेंशन उसी के हिसाब से मिलेगी।

एनपीएस में निवेश का रिटर्न बाज़ार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। जब कोई गैर-सरकारी सदस्य NPS से समय पूरा होने पर बाहर निकलता है, तो वह अपने कुल जमा फंड का 80% तक निकाल सकता है। लेकिन, बाकी बचे 20% पैसे से उसे एक पेंशन प्रोडक्ट खरीदना अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करता है कि रिटायरमेंट के बाद भी उसे कुछ नियमित आय मिलती रहे।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम लागू की गई है। इस स्कीम में पेंशन की राशि की गारंटी दी गई है। इस गारंटी का लाभ उठाने के लिए, कर्मचारियों को कम से कम 25 साल तक सेवा में रहना होगा। यदि वे यह शर्त पूरी करते हैं, तो उन्हें रिटायरमेंट से ठीक पहले के 12 महीनों में मिलने वाले औसत मूल वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलेगा। यह एक तरह से सुरक्षित भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है।

अगर किसी कर्मचारी की सेवा अवधि 25 साल से कम रहती है, तो भी उसे पेंशन मिलेगी। हालांकि, यह पेंशन उसकी सेवा अवधि के अनुसार ही तय की जाएगी। यानी, जितनी लंबी सेवा, उतनी ज़्यादा पेंशन। यह व्यवस्था कर्मचारियों को लंबी सेवा के लिए प्रोत्साहित करती है।