आम लोगों की आवाज

नवभारत टाइम्स

ईरान में जनता का गुस्सा कई सालों से पनप रहा है। गलत नीतियों, बाहरी दखल और दमन ने हालात बिगाड़े हैं। आम ईरानी जनता सबसे ज्यादा परेशान है। डॉनल्ड ट्रंप का दबाव स्थिति को और गंभीर बना सकता है। ईरान का भविष्य बंदूक या प्रतिबंधों से नहीं, बल्कि वहां के लोगों की आवाज से तय होगा।

आम लोगों की आवाज
ईरान में तीन पीढ़ियों से पनप रहा गुस्सा किसी एक नेता या देश की वजह से नहीं है। यह दशकों की गलत नीतियों, बाहरी दखलअंदाजी और अंदरूनी जुल्म का नतीजा है। इस आग में सबसे ज्यादा आम ईरानी जनता पिस रही है, जिसे धर्म, राष्ट्रवाद और भू-राजनीति के नाम पर दबाया गया है। डॉनल्ड ट्रंप का दबाव इस स्थिति को और बिगाड़ सकता है। ईरान का भविष्य बंदूकों या प्रतिबंधों से नहीं, बल्कि अपने लोगों की आवाज़ से तय होना चाहिए। यह बात प्रमोद सारस्वत ने ईमेल के ज़रिए कही है।

सारस्वत के मुताबिक, ईरान की मौजूदा हालत कई सालों से चली आ रही गलत फैसलों का नतीजा है। बाहरी ताकतों का दखल और सरकार का अपने ही लोगों पर ज़ुल्म, इन सबने मिलकर एक विस्फोटक माहौल तैयार किया है।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि आम ईरानी नागरिक इस पूरे मामले में सबसे ज़्यादा भुगत रहा है। उन्हें धर्म और राष्ट्रवाद के नाम पर लगातार दबाया गया है।

सारस्वत ने यह भी कहा कि डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां ईरान के हालात को और भी खतरनाक बना सकती हैं।

अंत में, उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान का भविष्य बंदूक की नोक पर या आर्थिक प्रतिबंधों से नहीं, बल्कि वहां के लोगों की आवाज़ उठाने से तय होगा।