Fake Order Upload No Action Even After Two Years File Stuck In Divisional Commissioners Office
फर्ज़ी आदेश अपलोड करने वाले पर दो साल बाद भी कार्रवाई नहीं
नवभारत टाइम्स•
खाद्य विभाग में बड़ा खेल हुआ है। एक कोटे की दुकान के आवंटन को रद्द करने के बजाय, वेबसाइट पर फर्जी आदेश अपलोड कर दिया गया। यह मामला दो साल पुराना है। मंडलायुक्त के निर्देश पर जांच शुरू हुई, लेकिन फाइल दब गई। पीड़ित ने फिर शिकायत दर्ज कराई है। दोषियों पर कार्रवाई का इंतजार है।
लखनऊ: एक कोटे की दुकान के आवंटन को लेकर हुए फर्जीवाड़े का मामला करीब दो साल बाद भी अटका हुआ है। संयुक्त आयुक्त खाद्य (न्यायिक) कोर्ट के फैसले को उलटकर वेबसाइट पर अपलोड करने के आरोप में जिम्मेदार लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मंडलायुक्त के आदेश पर जांच शुरू हुई थी, लेकिन फाइल आयुक्त कार्यालय में ही दब गई है। पीड़ित ने अब मंडलायुक्त कार्यालय में फिर से शिकायत दर्ज कराई है।
यह पूरा मामला उन्नाव के बांगरमऊ का है। वहां श्याम नाम के व्यक्ति को एक कोटे की दुकान मिली थी। दुकान में घटतौली और अन्य गड़बड़ियों की शिकायतें मिलने पर एसडीएम कोर्ट ने दुकान का आवंटन रद्द कर दिया था। दुकानदार ने इस फैसले के खिलाफ संयुक्त आयुक्त खाद्य (न्यायिक) की कोर्ट में अपील की थी।पीड़ित के वकील माधुरी भूषण तिवारी ने बताया कि उस समय के संयुक्त आयुक्त खाद्य (न्यायिक) अखिल कुमार सिंह ने दुकानदार को राहत देने से इनकार कर दिया था। लेकिन आरोप है कि उनके पेशकार ने चालाकी से फैसले के बिल्कुल उलट एक आदेश टाइप किया और उसे वेबसाइट पर डाल दिया। जब पीड़ित को इस गड़बड़ी का पता चला तो उन्होंने तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब से शिकायत की।
मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। तत्कालीन मंडलायुक्त के निर्देश पर अपर आयुक्त न्यायिक (द्वितीय) घनश्याम सिंह ने 8 नवंबर 2023 को संयुक्त आयुक्त खाद्य को जांच का जिम्मा सौंपा था। सूत्रों का कहना है कि जांच तो पूरी हो गई है, लेकिन फाइल को जानबूझकर दबा दिया गया है। इस वजह से न तो दुकान का आवंटन रद्द होने का असली आदेश फिर से जारी हुआ और न ही फर्जी आदेश बनाने वाले कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई हुई। पीड़ित को अब भी न्याय का इंतजार है और उन्होंने मंडलायुक्त कार्यालय में एक बार फिर गुहार लगाई है। यह मामला सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।