Trauma Center Patient Sent To Private Hospital Case Government Seeks Report Letter Sent To Kgmu Registrar
ट्रॉमा सेंटर से मरीज को निजी अस्पताल भेजने के मामले में शासन ने मांगी रिपोर्ट
नवभारत टाइम्स•
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर से मरीज को दलालों के माध्यम से निजी अस्पताल भेजने का मामला सामने आया है। शासन ने इस पर संज्ञान लेते हुए केजीएमयू के कुलसचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बलरामपुर के एक मरीज को केजीएमयू से रेफर किया गया था, जहां बेड न मिलने पर दलालों ने उसे निजी अस्पताल पहुंचाया।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर से मरीजों को दलालों के ज़रिए निजी अस्पतालों में भेजने के गंभीर मामले पर शासन ने तुरंत एक्शन लिया है। इस पूरे मामले की जानकारी मिलने के बाद, शासन ने केजीएमयू के कुलसचिव को एक पत्र भेजकर पूरी रिपोर्ट मांगी है। यह घटना बलरामपुर जिले के राम भिलाव नाम के एक मरीज से जुड़ी है, जिनकी तबीयत 26 दिसंबर को अचानक बिगड़ गई थी।
राम भिलाव के परिवारवाले उन्हें पहले जिला अस्पताल ले गए, जहाँ से डॉक्टरों ने उन्हें केजीएमयू रेफर कर दिया। उसी दिन मरीज को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर लाया गया। लेकिन वहाँ के डॉक्टरों ने कहा कि बेड खाली नहीं है। कुछ देर बाद, मरीज के बेटे सुनील को एक फोन आया। फोन करने वाले ने सस्ते इलाज का लालच देकर मरीज को किसी निजी अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। इसके बाद, ट्रॉमा सेंटर के गेट पर एक एंबुलेंस आई और दलाल मरीज को गोमतीनगर के विभूतिखंड में स्थित एक निजी अस्पताल ले गए।निजी अस्पताल में मरीज से 36 हजार रुपये वसूल लिए गए। इसके बाद, उन्होंने मरीज को बंधक बना लिया। जब पुलिस को इस बात की खबर लगी, तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर मरीज को छुड़ाया। इस पूरे मामले में, 14 जनवरी को अनुसचिव ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ला ने कुलसचिव को एक पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में लिखा है, "नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।" यह घटना बताती है कि कैसे कुछ लोग मरीजों की मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। शासन की इस कार्रवाई से उम्मीद है कि ऐसे दलालों पर नकेल कसी जाएगी और मरीजों को सुरक्षित इलाज मिल सकेगा। केजीएमयू जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में भी अगर बेड की कमी है, तो यह एक चिंता का विषय है। शासन को इस पर भी ध्यान देना चाहिए ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।