लखनऊ की टीम ने की ट्रेन की टेस्टिंग

नवभारत टाइम्स

लखनऊ की टीम ने पहली हाइड्रोजन ट्रेन की टेस्टिंग शुरू कर दी है। लोग इस ट्रेन को पटरी पर देखने का इंतजार कर रहे हैं। टीम ने पावर कार और सुरक्षा उपकरणों पर विशेष ध्यान दिया। अलग-अलग गति पर स्पीड सेंसर और कंट्रोल सिस्टम को परखा गया। ट्रेन के पायदानों की मजबूती और ऊंचाई की भी जांच की गई।

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देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को पटरियों पर दौड़ाने की तैयारी ज़ोरों पर है। रेलवे ट्रेन के हर छोटे-बड़े पहलू पर बारीकी से काम कर रहा है। मंगलवार को लखनऊ से आई एक खास टीम ने ट्रेन का टेस्ट किया। टीम ने खास तौर पर पावर कार और उससे जुड़े सुरक्षा और कंट्रोल वाले पुर्जों पर ध्यान दिया। ट्रेन की स्पीड बताने वाले सेंसर और कंट्रोल सिस्टम को अलग-अलग स्पीड पर चलाकर देखा गया। इसका मकसद यह पक्का करना था कि ट्रेन तय नियमों के हिसाब से सुरक्षित चले। टेस्टिंग के दौरान ट्रेन को धीरे-धीरे और फिर थोड़ी तेज़ स्पीड पर चलाया गया। इस दौरान पुर्जे कैसे काम कर रहे हैं, इसकी जानकारी रिकॉर्ड की गई। ट्रेन के पायदानों की मज़बूती और उनकी ऊंचाई भी जांची गई।

यह हाइड्रोजन ट्रेन देश के लिए एक बड़ा कदम है। लोग इसे पटरियों पर देखने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। रेलवे इस ट्रेन को चलाने के लिए हर छोटी से छोटी बात का ध्यान रख रहा है। लखनऊ से आई विशेषज्ञों की टीम ने ट्रेन की सुरक्षा और उसके चलने के तरीके को परखा। उन्होंने पावर कार, जो ट्रेन को ताकत देती है, और उससे जुड़े सुरक्षा उपकरणों की जांच की। स्पीड सेंसर , जो बताते हैं कि ट्रेन कितनी तेज़ चल रही है, और कंट्रोल सिस्टम, जो ट्रेन को काबू में रखते हैं, इन सबको अलग-अलग स्पीड पर टेस्ट किया गया। यह सब इसलिए किया गया ताकि यह पक्का हो सके कि ट्रेन पूरी तरह सुरक्षित है और तय स्पीड लिमिट में चल सकती है।
टेस्टिंग के दौरान, ट्रेन को पहले धीमी गति से चलाया गया। फिर उसकी स्पीड थोड़ी बढ़ाई गई। इस दौरान, सभी पुर्जे ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं, इसकी जानकारी दर्ज की गई। ट्रेन के पायदान, जिनसे यात्री चढ़ते-उतरते हैं, उनकी मज़बूती और उनकी सही ऊंचाई की भी जांच की गई। यह सुनिश्चित किया गया कि वे यात्रियों के लिए सुरक्षित हों।