'गलत कॉपी जांची तो परीक्षक पर लगाया जाए आर्थिक दंड'

नवभारत टाइम्स

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में सावधानी बरतने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि गलत मूल्यांकन पाए जाने पर परीक्षकों पर आर्थिक दंड लगना चाहिए। इससे वे अधिक सतर्क रहेंगे। साथ ही, पीजी के छात्रों से भी मूल्यांकन कार्य कराया जा सकता है। इससे परीक्षकों की कमी पूरी होगी और छात्रों को अनुभव मिलेगा।

examiners who check wrong copies will be fined governor gives instructions
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) की एक बैठक में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में अधिक सावधानी बरतने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन में गड़बड़ी पाए जाने पर परीक्षकों पर आर्थिक दंड लगाया जाना चाहिए, जिससे वे अधिक सतर्क रहें। साथ ही, उन्होंने पीजी छात्रों से भी निचली कक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराने का सुझाव दिया ताकि परीक्षकों की कमी पूरी हो सके और छात्रों को अनुभव मिले। यह बैठक राजभवन में एकेटीयू के परीक्षा और मूल्यांकन के नए प्रयासों पर चर्चा के लिए आयोजित की गई थी।

राज्यपाल ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि विश्वविद्यालय को यह आकलन करना चाहिए कि विद्यार्थी औसतन कितने पृष्ठ लिखते हैं। इसी औसत के आधार पर उन्हें दी जाने वाली उत्तर पुस्तिकाओं के पृष्ठों की संख्या तय की जानी चाहिए। इससे कागज की बर्बादी रुकेगी। यदि जरूरत पड़े तो छात्रों को अतिरिक्त पृष्ठ दिए जा सकते हैं।
राज्यपाल ने नकल के मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नकल में पकड़े जाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को बुलाकर उनसे बात की जानी चाहिए। यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि किन कारणों से विद्यार्थी ऐसी हरकतें करने को मजबूर हुए। इस संवाद से समस्या की जड़ तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

एकेटीयू की ओर से राजभवन में हुई इस बैठक में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय और परीक्षा नियंत्रक प्रो. दीपक नागरिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय ने राज्यपाल के समक्ष परीक्षा और मूल्यांकन में किए गए नए प्रयासों का एक प्रेजेंटेशन भी दिया। इस दौरान राज्यपाल ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना है।

राज्यपाल के सुझावों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन निष्पक्ष और सटीक हो। आर्थिक दंड का प्रावधान परीक्षकों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित करेगा। वहीं, पीजी छात्रों को मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल करने से न केवल परीक्षकों की कमी दूर होगी, बल्कि छात्रों को भी व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा। यह कदम विश्वविद्यालय के लिए एक नई दिशा प्रदान कर सकता है।

इसके अतिरिक्त, उत्तर पुस्तिकाओं के पृष्ठों की संख्या का निर्धारण छात्रों द्वारा लिखे जाने वाले औसतन पृष्ठों के आधार पर करने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा। यह एक ऐसा कदम है जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ लागत प्रभावी भी साबित हो सकता है।

नकल के मामलों में अभिभावकों से संवाद करने का सुझाव एक संवेदनशील दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह मानता है कि कई बार छात्र बाहरी दबाव या अन्य कारणों से गलत रास्ते पर चले जाते हैं। ऐसे में, समस्या को समझने और उसका समाधान खोजने के लिए अभिभावकों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। यह केवल दंड देने के बजाय सुधार पर केंद्रित एक दृष्टिकोण है।