टकराव ठीक नहीं

नवभारतटाइम्स.कॉम
withdraw cases against students or conflict will escalate cjp
कॉकरोच जनता पार्टी ( CJP ) का यह आरोप गंभीर है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दिल्ली सहित दूसरे BJP शासित राज्यों में कइयों को हिरासत में लिया गया है या उन्हें परेशान किया जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच आंदोलन खत्म करने के लिए जो सहमति बनी थी, उसमें यह बात शामिल थी कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर मुकदमे दायर नहीं किए जाएंगे।

लोकतांत्रिक अधिकार । केंद्र सरकार को यह वादा पूरा करना चाहिए क्योंकि इससे उन छात्रों का भविष्य बर्बाद हो सकता है। ये छात्र पेपर लीक से परेशान होकर सड़कों पर उतरे थे और उनकी मांग जायज थी। खुद सरकार ने भी माना कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक की समस्या गंभीर रही है। इसी वजह से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा भी दिया। अगर छात्र एक जायज मांग को लेकर सड़कों पर उतरे और अपने लोकतांत्रिक अधिकारियों का प्रयोग किया तो उन पर मुकदमा क्यों दर्ज हो। फिर यह सरकार के CJP से किए वादे के भी खिलाफ है।
सुधारों पर हो ध्यान । अगर मुकदमे वापस नहीं लिए जाते तो दोनों पक्षों के बीच टकराव बढ़ने का भी अंदेशा है। CJP का कहना है कि अगर प्रदर्शनकारी छात्रों पर किए गए मुकदमे वापस नहीं लिए जाते और हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ा नहीं जाता तो वह फिर से सड़क पर उतरने को मजबूर हो जाएगी। सरकार को इस टकराव से बचना चाहिए और परीक्षा सुधारों पर ध्यान देना चाहिए।

एके-47 से फायरिंग । छात्र आंदोलन में पुलिस ज्यादती की खबरें भी परेशान करने वाली हैं। बिहार में स्पेशल टास्क फोर्स के एक जवान को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सिवान में एके-47 से हवाई फायरिंग करने पर निलंबित किया गया है। पुलिस ने यह भी बताया कि हवाई फायरिंग में कोई घायल नहीं हुआ है। इसके बावजूद इस मामले को संजीदगी से लेने की जरूरत है। सरकार को इसकी जांच करवानी चाहिए और अगर पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाना चाहिए।

पुलिस की ज्यादती । वैसे, सिवान में ही तीन प्रदर्शनकारियों को गोलियां भी लगी थीं, जिन्हें खतरे से बाहर बताया जा रहा है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस ने बल प्रयोग किया था। विपक्षी दलों का आरोप है कि इन पर पेलेट गन का भी इस्तेमाल हुआ। इन सभी मामलों में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सजा भी। अपनी मांगों के लिए प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार है और उसकी हर हाल में रक्षा की जानी चाहिए।

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