कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों की सफलता में कोचों का अहम योगदान: पी.टी. उषा

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ग्लासगो, 27 जुलाई (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों के शानदार प्रदर्शन के पीछे उनके कोचों की अथक मेहनत और समर्पण है। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) की अध्यक्ष पी.टी. उषा ने इस बात पर जोर दिया कि हर पदक कोचों की सालों की मेहनत का नतीजा है, जो एथलीटों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आईओए कोचों के योगदान को बहुत महत्व देता है और एथलीटों को मजबूत कोचिंग सपोर्ट देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

पी.टी. उषा ने आईओए की एक विज्ञप्ति में कहा, "एक एथलीट के तौर पर, मेरा हमेशा से मानना रहा है कि हर शानदार प्रदर्शन के पीछे एक बेहतरीन कोच होता है। कोच सालों तक प्रतिभा को निखारने, आत्मविश्वास बनाने और एथलीटों को उनके सबसे बड़े पलों के लिए तैयार करने में बिताते हैं, हो सकता है कि वे पोडियम पर न खड़े हों, लेकिन भारत का जीता हर पदक एक कोच की प्रतिबद्धता और त्याग को दिखाता है। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन उनके योगदान को बहुत महत्व देता है। हम अपने एथलीटों को मजबूत कोचिंग सपोर्ट देने पर फोकस कर रहे हैं।"
एथलीट प्रतियोगिता के दिनों में चमकते हैं, लेकिन उनकी सफलता की नींव कोच सालों की मेहनत से रखते हैं। कोच सिर्फ ट्रेनिंग प्लान, रिकवरी शेड्यूल, रणनीतिक चर्चा और वीडियो विश्लेषण ही नहीं बनाते, बल्कि एथलीटों को दबाव में मानसिक रूप से केंद्रित रखने के लिए लगातार उनसे व्यक्तिगत बातचीत भी करते हैं। वे अक्सर मेंटर, मनोवैज्ञानिक, रणनीतिकार और प्रेरक के रूप में काम करते हैं।

ग्लासगो में भारत की वेटलिफ्टिंग में मिली सफलता ने इस कोच-एथलीट साझेदारी की अहमियत को फिर से साबित किया। मुख्य कोच विजय शर्मा, जिन्होंने ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू को लगातार अंतरराष्ट्रीय सफलता दिलाने में मार्गदर्शन किया, भारत को वेटलिफ्टिंग में एक पावरहाउस बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उनके साथ, सहायक कोच और सपोर्ट स्टाफ भी एथलीटों को प्रतियोगिता के दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रखने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।

पूरी भारतीय टीम में, हर खेल के लिए कोचिंग विशेषज्ञता मौजूद है। एथलेटिक्स के मुख्य कोच राधाकृष्णन नायर एक कुशल टीम का नेतृत्व करते हैं, जो स्प्रिंट, मिडिल और लंबी दूरी की दौड़, कूद और फेंकने वाले इवेंट्स के विशेषज्ञों को सपोर्ट करती है। नीरज चोपड़ा और मुरली श्रीशंकर जैसे शीर्ष एथलीटों को अपने निजी कोचों के साथ बेहतर तालमेल का फायदा मिलता है।

तैराकी में, कोच निहार अमीन और संदीप सेजवाल अपने तकनीकी ज्ञान और एलीट प्रतियोगी अनुभव को मिलाकर भारतीय तैराकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। मुक्केबाजी कोच विपक्षी खिलाड़ियों का अध्ययन करने, रणनीति को बेहतर बनाने और राउंड के बीच महत्वपूर्ण सलाह देने में घंटों बिताते हैं। कुछ शब्द एक कड़े मुकाबले का नतीजा बदल सकते हैं।

यही बात भारत के पैरा एथलीटों पर भी लागू होती है। टीम इंडिया का अभियान पैरा पावरलिफ्टिंग में पदक के साथ शुरू हुआ, जो ध्यान से की गई तैयारी और कोच-एथलीट के मजबूत रिश्तों की महत्ता को दर्शाता है। जितेंद्र पाल सिंह जैसे कोच पैरा एथलीटों को कॉमनवेल्थ मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करते हैं। आईओए ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी खेलों के एथलीटों को पूरे गेम्स के दौरान अनुभवी कोचों और तकनीकी स्टाफ का सहयोग मिले।

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