तबादले के 12 दिन बाद आदेश मिलने पर सवाल

नवभारतटाइम्स.कॉम
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nNBT न्यूज, जालौन: तत्कालीन जालौन एसडीएम (IAS अधिकारी) रिंकू सिंह राही को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा विवाद सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट को लेकर है। बुधवार 29 जुलाई को वो नगर पालिका परिषद उरई में कथित अनियमितताओं की जांच करने पहुंचे थे। हालांकि उन्हें जांच से जुड़े दस्तावेज नहीं दिखाए। इसे लेकर नगर पालिका के अफसरों से उनकी कहासुनी भी हुई। इस बीच उनके तबादले का आदेश सामने आ गया, जिसपर 17 जुलाई की तारीख थी। इसे लेकर 29 जुलाई को रात 10:30 पर X पर पोस्ट करते हुए भ्रष्टाचार को संरक्षण, बैक डेट में पत्र जारी करने और डिस्पैच रजिस्टर के दुरुपयोगी की बात लिखी है।

IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही के अपने पोस्ट में प्रशासनिक व्यवस्था, व्यक्तिगत सिद्धांतों, सुशासन और सेवा के दौरान मिलने वाले अवसरों को लेकर गंभीर विचार और चिंता व्यक्त की गई हैं। लिखा कि भ्रष्टाचार को इतना अधिक खुलेआम संरक्षण? इतनी अधिक हिम्मत कहां से आती है? मुजफ्फरनगर प्रकरण को इसके आगे अदना सा बताया है। इन सभी हालातों को देखते हुए IAS बनने का मतलब विश्व युद्ध के मैदान में फौजी बनने जैसा बताया है। उन्होंने अपने कैडर को बदलने और ऐसी जगह स्थानांतरण के आग्रह की बात की है जहां भले ही भ्रष्टाचार हो लेकिन संरक्षण न हो।
नगर पालिका उरई में सभासदों की भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद जिलाधिकारी के आदेश से 18 जून को अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद्र मौर्य की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई थी। इसमें तत्कालीन एसडीएम रिंकू सिंह राही और अधिशासी अभियंता अमित सक्सेना बतौर सदस्य शामिल किए गए थे। रिंकू सिंह के स्थानांतरण के चलते 6 जुलाई को उनकी जगह राकेश कुमार सोनी को जांच समिति में शामिल किया गया। आरोप है कि रिंकू सिंह को तबादले का आदेश नहीं दिया गया था।

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