सहारनपुर में बाढ़ राहत सामग्री के नाम पर 18 लाख की धोखाधड़ी, FIR दर्ज़

नवभारत टाइम्स

सहारनपुर में बाढ़ राहत सामग्री के नाम पर एक बड़ी धोखाधड़ी हुई है। रुद्राक्ष एग्रो फर्म ने महालक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी को करीब 18 लाख रुपये की सामग्री भेजी। आरोपियों ने भुगतान के नाम पर टालमटोल किया। जब फर्म ने पता लगाया तो पता चला कि प्रशासन से भुगतान हो चुका है।

सहारनपुर में बाढ़ राहत सामग्री के नाम पर 18 लाख की धोखाधड़ी, FIR दर्ज़
सहारनपुर में बाढ़ राहत सामग्री के नाम पर 18 लाख रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। खुद को पति-पत्नी बताने वाले एक जोड़े ने रुद्राक्ष एग्रो फर्म से माल मंगवाया, लेकिन भुगतान करने के बजाय टालमटोल करते रहे। पैसे मांगने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई। थाना मंडी पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गोंडा जिले के निवासी रामलल्लन शुक्ला, जो रुद्राक्ष एग्रो फर्म में मैनेजर हैं, ने पुलिस को शिकायत दी है। उन्होंने बताया कि उनकी फर्म बाढ़ राहत सामग्री सप्लाई करती है। कुछ समय पहले सहारनपुर के आशीष सिंघल और सविता सिंघल ने उनसे संपर्क किया। उन्होंने खुद को पति-पत्नी बताया और सविता सिंघल को महालक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी, किशन बाजार, चिलकाना रोड का प्रोपराइटर बताया।
आरोपियों ने शुक्ला को बताया कि सहारनपुर जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ राहत सामग्री का टेंडर उन्हें मिला है और उन्हें बड़ी मात्रा में सामग्री की जरूरत है। इस पर भरोसा करके रुद्राक्ष एग्रो फर्म ने 4 जुलाई 2025 को करीब 18 लाख 35 हजार 250 रुपये की राहत सामग्री महालक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी के नाम भेज दी।

रामलल्लन शुक्ला का आरोप है कि आरोपियों ने वादा किया था कि जिला प्रशासन से भुगतान मिलते ही वे तुरंत फर्म को पैसे दे देंगे। लेकिन करीब सात महीने बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। हर बार यही बहाना बनाया जाता रहा कि प्रशासन से अभी पैसा नहीं मिला है।

जब शुक्ला को शक हुआ तो उन्होंने सहारनपुर आकर संबंधित विभाग से जानकारी ली। तब पता चला कि प्रशासन की ओर से महालक्ष्मी ट्रेडिंग कंपनी को भुगतान काफी पहले ही किया जा चुका है। इसके बाद जब शुक्ला ने आरोपियों से अपने पैसे मांगे तो उन्होंने कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दे दी। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच कर रही है। यह घटना राहत सामग्री की आपूर्ति के नाम पर हुए बड़े घोटाले की ओर इशारा करती है। पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी है ताकि इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश हो सके और पीड़ित को न्याय मिल सके। इस तरह की घटनाएं सरकारी योजनाओं की आड़ में होने वाले अपराधों को उजागर करती हैं और आम जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाती हैं। पुलिस की जांच से उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।