'OTT पर हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब'

नवभारत टाइम्स

कमर्शल वाहनों पर वन टाइम टैक्स की अनिवार्यता का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। ट्रेवल ऐंड ट्रांसपोर्ट ओनर्स वेलफेयर असोसिएशन ने याचिका दायर की है। सरकार ने जवाब के लिए 19 मार्च का समय मांगा है। इस अध्यादेश से टैक्सी धारकों को चालान और वाहन सीज होने की परेशानी हो रही है।

high court seeks response from government on one time tax time sought till march 19
लखनऊ: कमर्शल वाहनों पर वन टाइम टैक्स की अनिवार्यता के खिलाफ अब हाई कोर्ट में मामला पहुंच गया है। ट्रेवल ऐंड ट्रांसपोर्ट ओनर्स वेलफेयर असोसिएशन ने याचिका दायर की है, जिस पर सरकार ने जवाब देने के लिए 19 मार्च तक का समय मांगा है। इस अध्यादेश के कारण प्रदेश भर के टैक्सी चालकों को भारी चालान और वाहन सीज होने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

असोसिएशन के अध्यक्ष पीयूष गुप्ता ने बताया कि वन टाइम टैक्स के नियम से टैक्सी मालिकों को बहुत दिक्कतें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और मंत्रियों से गुहार लगाने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला। हालांकि, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने इस मामले की गंभीरता को समझा है। उन्होंने परिवहन मंत्री को फोन करके इस पर बात की है। वित्त मंत्री ने 23 मार्च को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस नियम में बदलाव का भरोसा दिलाया है।
इस बीच, नोएडा बस असोसिएशन के अध्यक्ष संदीप दुप्पल और सन ट्रांसमूवर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने भी हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। पीयूष गुप्ता ने बताया कि सरकार ने कोर्ट से 19 मार्च की तारीख मांगी है। यह वन टाइम टैक्स का मतलब है कि वाहन मालिक को एक ही बार में पूरा टैक्स देना होगा। पहले यह सुविधा किस्तों में टैक्स भरने की थी, लेकिन नए नियम से यह बंद हो गई है। इससे छोटे टैक्सी मालिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।