70 Marksheet Records Suspect In Mangalayatan And Subharti Universities Fake Certificate Investigation Intensifies
मंगलायतन और सुभारती विवि में 70% मार्कशीट का रेकॉर्ड नहीं
नवभारत टाइम्स•
देश के १४ विश्वविद्यालयों से जुड़ी फर्जी मार्कशीट मामले में पुलिस जांच कर रही है। सुभारती और मंगलायतन विवि ने बताया कि करीब ७० प्रतिशत रिकॉर्ड संदिग्ध हैं। चार अन्य विश्वविद्यालयों ने विवरण को पूरी तरह नकार दिया है। जांच एजेंसियां छात्रों की प्रवेश, परीक्षा और डिग्री की प्रक्रिया का पता लगा रही हैं।
कानपुर: देश भर के 14 विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट , डिग्री और प्रमाणपत्र बनाने के एक बड़े मामले में पुलिस तेजी से जांच कर रही है। इस मामले में अब तक पांच-छह विश्वविद्यालयों से रिकॉर्ड की जांच की गई है, जिसमें सुभारती और मंगलायतन यूनिवर्सिटी ने बताया कि करीब 30% रिकॉर्ड ही सही पाए गए हैं, जबकि 70% संदिग्ध हैं। चार अन्य विश्वविद्यालयों ने तो दिए गए विवरण को पूरी तरह से गलत बताया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन फर्जी दस्तावेजों के सहारे पढ़ाई करने वाले छात्रों ने दाखिला, परीक्षा और डिग्री हासिल करने की प्रक्रिया पूरी की थी या नहीं। इस फर्जीवाड़े में गिरफ्तार ललित मोहन अवस्थी को कथित सरगना शैलेंद्र का एजेंट बताया जा रहा है।
पुलिस ने देश के 9 राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों से जुड़े इस फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। जब्त किए गए सभी दस्तावेज कोर्ट में जमा कर दिए गए हैं। पुलिस अब हर छात्र के नाम, रोल नंबर और विश्वविद्यालय के आधार पर संबंधित संस्थानों से रिकॉर्ड की जांच करवा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इन छात्रों ने वास्तव में पढ़ाई की थी या सिर्फ फर्जी डिग्री हासिल कर ली थी।जांच में सामने आया है कि सुभारती और मंगलायतन यूनिवर्सिटी ने अपने रिकॉर्ड चेक करवाए। इन दोनों विश्वविद्यालयों ने बताया कि कुछ नाम और रोल नंबर उनके रिकॉर्ड में मिले हैं, लेकिन ज्यादातर नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 30% नाम और रोल नंबर ही सही पाए गए हैं, जबकि 70% संदिग्ध हैं। इसका मतलब है कि इन विश्वविद्यालयों के 70% छात्र फर्जी डिग्री वाले हो सकते हैं।
इसके अलावा, चार अन्य विश्वविद्यालयों ने तो साफ तौर पर कह दिया है कि उनके पास ऐसे किसी भी छात्र का कोई रिकॉर्ड नहीं है। कुछ संस्थानों ने तो यह भी बताया कि जो रोल नंबर और एनरोलमेंट नंबर दिए गए हैं, वे उनके तय पैटर्न से बिल्कुल भी मेल नहीं खाते। इससे यह साफ हो रहा है कि फर्जीवाड़े का यह जाल बहुत बड़ा है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन छात्रों ने दाखिला लिया था, परीक्षा दी थी और डिग्री प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया का पालन किया था। इस पूरे फर्जीवाड़े में गिरफ्तार किए गए ललित मोहन अवस्थी को कथित सरगना शैलेंद्र का एजेंट बताया जा रहा है। पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से भी इस मामले में विस्तृत जानकारी मांगी गई है और अब पुलिस उनके जवाब का इंतजार कर रही है। उम्मीद है कि इस विश्वविद्यालय से मिलने वाली जानकारी से मामले को सुलझाने में और मदद मिलेगी। यह पूरा मामला शिक्षा जगत में हो रहे फर्जीवाड़े को उजागर करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत पर जोर देता है।