निवासियों ने सुविधाओं की मांग कर किया प्रदर्शन

नवभारत टाइम्स

आम्रपाली रिवर व्यू सोसायटी के लोग सुविधाओं और पार्किंग की कमी से परेशान हैं। वे लगातार पांचवें सप्ताह प्रदर्शन कर रहे हैं। सोसायटी में 700 परिवार रहते हैं, लेकिन पार्किंग सिर्फ 570 गाड़ियों की है। एनबीसीसी इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रही है। बायर्स पार्किंग चार्ज देने के बाद भी ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

amrapali river view society residents continue protest for fifth week over lack of amenities and parking
आम्रपाली रिवर व्यू सोसायटी के करीब 700 परिवार पिछले पांच हफ्तों से अपनी पार्किंग और अन्य सुविधाओं की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। निवासियों का आरोप है कि सोसायटी में केवल 570 गाड़ियों के लिए ही पार्किंग की जगह है, जिससे खुले इलाकों में गाड़ियां खड़ी करने को लेकर झगड़े होते हैं। वे एनबीसीसी पर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगा रहे हैं। कोर्ट रिसीवर ने पोडियम के ऊपर एक और पोडियम बनाकर कवर्ड पार्किंग और ग्रीन पार्क बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन इस पर कोई काम शुरू नहीं हुआ है। निवासियों का कहना है कि जिस जगह को पार्क के लिए तय किया गया था, उसे अब ओपन पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्किंग शुल्क देने के बावजूद सुविधा न मिलने से खरीदार ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

ग्रेनो में एनबीटी न्यूज के अनुसार, आम्रपाली रिवर व्यू सोसायटी के लोग लगातार पांचवें रविवार को सड़कों पर उतरे। उनकी मुख्य मांगें हैं कि उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलें और पार्किंग की समस्या का समाधान हो। सोसायटी में रहने वाले लगभग 700 परिवारों के लिए पार्किंग की जगह बहुत कम है। केवल 570 गाड़ियां ही पार्क हो सकती हैं। इस वजह से लोग अपनी गाड़ियां खुले में खड़ी करने को मजबूर हैं। इससे अक्सर विवाद होते रहते हैं।
निवासी इस बात से बहुत नाराज हैं कि एनबीसीसी उनकी परेशानी पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने बताया कि कोर्ट रिसीवर ने एक अच्छा सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि पोडियम के ऊपर एक और पोडियम बनाकर कवर्ड पार्किंग और हरा-भरा पार्क बनाया जाए। लेकिन, इस सुझाव पर अब तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है।

निवासियों का यह भी आरोप है कि जिस जगह को पार्क बनाने के लिए चुना गया था, अब उसे ओपन पार्किंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह बात उन्हें और भी परेशान कर रही है। वे पार्किंग के लिए पैसे भी देते हैं, लेकिन उन्हें वह सुविधा नहीं मिल रही है जिसकी वे उम्मीद करते हैं। इस कारण खरीदार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि उनके साथ धोखा हुआ है।