मानदेय न बढ़ने से रसोइये निराश

नवभारत टाइम्स

प्रदेश के 3.75 लाख रसोइये मात्र 2000 रुपये मानदेय पर काम कर रहे हैं। शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ा, पर रसोइयों को अब भी इंतजार है। वे 10 महीने का मानदेय पाते हैं और 11 महीने की मांग कर रहे हैं। अप्रैल से पहले मानदेय न बढ़ा तो आंदोलन होगा।

cooks disappointed due to non increase in honorarium warning of protest if demands not met before april
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जहां शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने का ऐलान हो चुका है, वहीं बेसिक स्कूलों में खाना बनाने वाली रसोइयों को अब भी अपने मानदेय में बढ़ोतरी का इंतजार है। मात्र 2000 रुपये मासिक मानदेय पर काम कर रही रसोइयां अप्रैल से पहले मानदेय न बढ़ने पर आंदोलन की चेतावनी दे रही हैं।

प्रदेश भर के बेसिक स्कूलों में लगभग 3.75 लाख रसोइयां खाना बनाती हैं, जिनमें से 90 फीसदी महिलाएं हैं। उन्हें वर्तमान में केवल 2000 रुपये मानदेय मिलता है, जो आखिरी बार 2022 में 1500 रुपये से बढ़ाकर किया गया था। यह मानदेय भी उन्हें साल में केवल 10 महीने ही मिलता है। रसोइयां लंबे समय से शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों की तरह 11 महीने का मानदेय देने की मांग कर रही हैं, लेकिन उनकी यह मांग भी अभी तक पूरी नहीं हुई है।
रसोइया कल्याणकारी समिति के महासचिव उमा शंकर ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार से उम्मीद थी कि शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के साथ उनका भी मानदेय बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि वे जल्द ही अधिकारियों और मंत्रियों से मिलकर अपनी बात रखेंगे। उमा शंकर ने स्पष्ट किया कि यदि अप्रैल से पहले मानदेय बढ़ाने का ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। यह स्थिति प्रदेश के हजारों रसोइयों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, जो कम मानदेय और अनियमितता से परेशान हैं।