ईरान में फंसे इंजीनियर के परिवार की बढ़ी चिंता, 4 दिन से संपर्क नहीं

नवभारत टाइम्स

ईरान में फंसे भारतीय इंजीनियर केतन मेहता के परिवार की चिंता बढ़ गई है। केतन से चार दिन से संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्हें ईरानी नौसेना ने जहाज सहित बंधक बनाया था। भारतीय दूतावास के प्रयास से कुछ सदस्य रिहा हुए थे, लेकिन केतन अभी भी तेहरान जेल में हैं।

family of engineer ketan mehta stuck in iran worried no contact for 4 days
गाजियाबाद के डीएलएफ कॉलोनी में रहने वाले मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता के परिवार की चिंता ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले के बाद और बढ़ गई है। केतन मेहता, जो तेहरान की जेल में बंद हैं, से उनके परिवार की चार दिन पहले आखिरी बार बात हुई थी। उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। केतन मेहता के पिता मुकेश मेहता ने बताया कि जिस जहाज पर केतन तैनात थे, उसे 8 दिसंबर को ईरानी नौसेना ने अपने कब्जे में ले लिया था और चालक दल के सभी सदस्यों को बंधक बना लिया था। करीब एक महीने बाद पता चला कि केतन को तेहरान की जेल में उसके साथियों के साथ रखा गया है। भारतीय दूतावास के प्रयासों से 3 फरवरी को चालक दल के 16 में से आठ सदस्यों को रिहा करा लिया गया था, लेकिन केतन सहित आठ सदस्य अभी भी जेल में ही बंद हैं। उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो रही है और न ही उन्हें रिहा किया जा रहा है।

मुकेश मेहता ने बताया कि चार दिन पहले ही उनकी केतन से फोन पर बात हुई थी। तब तक भी चालक दल के सदस्यों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई थी। चार दिनों से उनका केतन से कोई संपर्क नहीं हो सका है। अब युद्ध शुरू होने से उनकी चिंता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। भारतीय दूतावास के सहयोग से चालक दल के सदस्यों को जेल से ही उनके परिवारों से बात करने की अनुमति मिली थी, जिसके चलते उनकी अक्सर केतन से बात होती रहती थी।
ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमलों ने मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता के परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। केतन मेहता, जो तेहरान की जेल में बंद हैं, से उनके परिवार की चार दिन पहले आखिरी बार बात हुई थी। उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। केतन के पिता मुकेश मेहता ने बताया कि जिस जहाज पर केतन काम करते थे, उसे 8 दिसंबर को ईरानी नौसेना ने अपने कब्जे में ले लिया था। जहाज पर मौजूद सभी लोगों को बंधक बना लिया गया था।

लगभग एक महीने बाद परिवार को पता चला कि केतन को तेहरान की जेल में उसके साथियों के साथ रखा गया है। भारतीय दूतावास ने काफी कोशिशें कीं। 3 फरवरी को चालक दल के 16 में से आठ सदस्यों को रिहा करा लिया गया था। लेकिन केतन और उनके साथ के आठ सदस्य अभी भी जेल में ही हैं। उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो रही है और न ही उन्हें छोड़ा जा रहा है।

मुकेश मेहता ने बताया कि चार दिन पहले ही उनकी केतन से फोन पर बात हुई थी। तब तक भी चालक दल के सदस्यों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई थी। चार दिनों से उनका केतन से कोई संपर्क नहीं हो सका है। अब युद्ध शुरू होने से उनकी चिंता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। भारतीय दूतावास के सहयोग से चालक दल के सदस्यों को जेल से ही उनके परिवारों से बात करने की अनुमति मिली थी। जिसके चलते उनकी अक्सर केतन से बात होती रहती थी।