ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन से दिखाई ताकत

नवभारत टाइम्स

ईरान ने AI से लैस मिसाइलों और ड्रोन की ताकत का प्रदर्शन किया है। एक वीडियो में अमेरिकी युद्धपोत पर हमले को दिखाया गया। ईरान का दावा है कि उसके ड्रोन और मिसाइलों में AI आधारित टारगेटिंग सिस्टम हैं। इससे हमलों की सटीकता बढ़ी है। अमेरिका और इजराइल पर हुए हमलों में यह प्रभावी दिखा।

ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन से दिखाई ताकत
ईरान ने 9 फरवरी को एक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बना वीडियो जारी किया। इस वीडियो में दिखाया गया कि कैसे ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलों और ड्रोन के झुंड ने अमेरिकी नौसेना के विशाल युद्धपोत अब्राहम लिंकन को तबाह कर दिया। यह वीडियो दुनिया को ईरान की सैन्य ताकत का संदेश देने के लिए था। इस वीडियो के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या ईरान ने अपनी मिसाइलों और ड्रोन सिस्टम में AI का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पहले भी यह दावा कर चुका है कि उन्होंने अपनी शाहेद सीरीज के ड्रोन और कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों में AI आधारित लक्ष्य साधने वाली प्रणाली (AI-based targeting system) लगाई है। इससे उनके हमलों की सटीकता बढ़ गई है। ड्रोन स्वार्म, यानी एक साथ कई ड्रोन का हमला, भी अब ज्यादा असरदार हो गया है। हाल ही में अमेरिका और इस्राइल पर हुए हमलों के बाद यह बात काफी हद तक सही साबित हुई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इस्राइल के तेल अवीव जैसे बड़े शहरों को निशाना बनाया और नुकसान पहुंचाया।
हालांकि, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान AI को अपनी सैन्य प्रणाली में जोड़ने की कोशिश तो कर रहा है, लेकिन युद्ध में इसका बड़े पैमाने पर सफल और साबित इस्तेमाल अभी तक साफ नहीं है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के AI से बने वीडियो का मकसद असल में युद्ध करना नहीं, बल्कि अपनी ताकत का प्रदर्शन करना और एक संदेश देना होता है।

इस AI वीडियो में दिखाया गया कि कैसे पहले दर्जनों ड्रोन एक साथ उड़ते हैं। फिर वे आपस में तालमेल बिठाकर जहाज को चारों तरफ से घेर लेते हैं। इसके बाद हाइपरसोनिक मिसाइलें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती हैं और कुछ ही पलों में एक बड़ा धमाका होता है। यह सब देखकर लगता है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। AI का मतलब है मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और सीखने की क्षमता देना। जब इसे मिसाइलों और ड्रोन में जोड़ा जाता है, तो वे खुद से लक्ष्य चुन सकते हैं और ज्यादा सटीकता से हमला कर सकते हैं।

ईरान के इस कदम से दुनिया भर में चिंताएं बढ़ गई हैं। खासकर अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। यह देखना होगा कि भविष्य में ईरान AI का इस्तेमाल अपनी सैन्य रणनीति में कितना और कैसे करता है।