निजी स्कूलों में ट्रांसपोर्टरों के भरोसे मासूमों का सफर

नवभारत टाइम्स

नोएडा के एक निजी स्कूल में यूकेजी का बच्चा सात घंटे तक बस में बंद रहा। माता-पिता ने बच्चे को ढूंढ निकाला। स्कूल ने माफी मांगी। स्कूल पैरंट्स से ट्रांसपोर्ट के नाम पर मोटी फीस लेते हैं। बसों का संचालन प्राइवेट ट्रांसपोर्टर करते हैं। ड्राइवर और कंडक्टर अक्सर बदलते रहते हैं। स्कूल इस मामले में मुनाफा कमाते हैं।

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नोएडा के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ यूकेजी का एक बच्चा स्कूल की प्राइवेट ट्रांसपोर्टर की बस में करीब 7 घंटे तक बंद रहा। घर न पहुंचने पर परेशान माता-पिता ने कड़ी धूप में 600 ट्रकों और 400 बसों के बीच अपनी बस ढूंढी और रोते-बिलखते बच्चे को बाहर निकाला। स्कूल ने इस मामले में माफी मांगी है, जबकि डीआईओएस ने जांच का आश्वासन दिया है। यह घटना स्कूलों द्वारा लाखों की फीस वसूलने के बावजूद ट्रांसपोर्ट व्यवस्था में बरती जा रही लापरवाही को उजागर करती है, जहाँ 70% से ज्यादा बसें प्राइवेट ट्रांसपोर्टरों की हैं और ड्राइवर-कंडक्टर अक्सर बदलते रहते हैं।

माता-पिता से स्कूल ट्रांसपोर्ट के नाम पर हजारों रुपये वसूले जाते हैं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को गैर-जिम्मेदार ट्रांसपोर्टरों के हवाले कर दिया जाता है। ऐसी घटनाएं होने पर ट्रांसपोर्टर बदल दिए जाते हैं और स्कूल माफी मांग लेते हैं। इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद, प्रशासन ने अभी तक स्कूल से कोई जवाब नहीं मांगा है और न ही कोई कार्रवाई की है।
नोएडा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष शिव कुमार ने बताया कि स्कूल पैरंट्स से प्रति बच्चा 4 हजार रुपये बस चार्ज के रूप में लेते हैं, जबकि ट्रांसपोर्टर के साथ उनका एग्रीमेंट प्रति बच्चा सिर्फ 2 से 2.5 हजार रुपये का होता है। इस तरह, स्कूल प्रति बच्चे पर 1500 से 2000 रुपये का मुनाफा कमाते हैं और सिरदर्द से पूरी तरह बच जाते हैं। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे स्कूल बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा अपने मुनाफे को प्राथमिकता दे रहे हैं।

यह घटना अभिभावकों के मन में गहरा डर पैदा करती है। वे अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं, यह भरोसा करके कि उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। लेकिन जब ऐसी घटनाएं होती हैं, तो यह भरोसा टूट जाता है। स्कूल की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, चाहे बसें प्राइवेट हों या स्कूल की। प्रशासन को भी इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।