जमीन पर काम बता बनाएंगे चुनावी हवा!

नवभारत टाइम्स

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है। राजनीतिक दल बूथ स्तर पर अपनी रणनीति बना रहे हैं। सरकार विकास कार्यों और अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बड़े प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण करेंगे।

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लखनऊ: अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। चुनाव आयोग वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने में जुटा है, वहीं राजनीतिक दल भी बूथ स्तर पर अपनी रणनीति बना रहे हैं। सरकार और संगठन मिलकर उपलब्धियों का बखान करने और सियासी मोर्चेबंदी करने में लगे हैं। इस साल हर महीने एक बड़े प्रोजेक्ट का लोकार्पण, निवेश और विकास से जुड़े बड़े आयोजनों की तैयारी है। इन आयोजनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी 'डबल इंजन' सरकार की ताकत का संदेश देगी। पिछले तीन महीनों में यूपी में आयोजनों की रफ्तार बढ़ी है, जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता साफ दिख रही है। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इन आयोजनों का दायरा और बढ़ाने की योजना है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर की उन परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है जो अंतिम चरण में हैं।

विकास और सियासत का संगम: पिछले तीन महीनों में पीएम मोदी उत्तर प्रदेश के आयोजनों में काफी सक्रिय रहे हैं। 25 दिसंबर को उन्होंने लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया, जहां उन्होंने सरकार की उपलब्धियों को गिनाया और विपक्ष पर भी निशाना साधा। जनवरी के पहले हफ्ते में वे वाराणसी में खेल से जुड़े एक आयोजन से वर्चुअल जुड़े। 24 जनवरी को यूपी स्थापना दिवस पर सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अमित शाह एक साथ मंच पर दिखे। पिछले महीने 21 फरवरी को पीएम मोदी ने नोएडा में सेमीकंडक्टर यूनिट के कार्यक्रम में वर्चुअल भाग लिया, और अगले ही दिन उन्होंने मेरठ से दिल्ली तक रैपिड रेल का उद्घाटन किया। मेरठ में उन्होंने विपक्ष पर तीखे सवाल उठाए और समर्थकों को सियासी संदेश दिया। उन्होंने संसद में कांग्रेस के व्यवहार की कड़ी आलोचना की और यूपी में योगी सरकार की उपलब्धियों की सराहना की।
चुनावों के लिए 'डबल इंजन' की ताकत का प्रदर्शन: यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, सत्ताधारी दल अपनी उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने और विपक्षी दलों को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में, सरकार एक के बाद एक बड़े प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण कर रही है। इन आयोजनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति को 'डबल इंजन' सरकार की ताकत के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। यह संदेश देने की कोशिश है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रदेश के विकास के लिए काम कर रही हैं।

बूथ स्तर पर चुनावी चक्रव्यूह: चुनाव आयोग वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने में जुटा है, ताकि कोई भी योग्य मतदाता वोट देने से वंचित न रह जाए। वहीं, राजनीतिक दल भी अपनी चुनावी बिसात बिछाने में लगे हैं। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और मतदाताओं से सीधा संपर्क साधने की कवायद तेज हो गई है। हर बूथ पर जीत का लक्ष्य लेकर दल अपनी रणनीति बना रहे हैं।

सरकार की उपलब्धियों का बखान: पिछले तीन महीनों में उत्तर प्रदेश में विकास और निवेश से जुड़े कई बड़े आयोजन हुए हैं। इन आयोजनों के माध्यम से सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रख रही है। चाहे वह राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन हो, सेमीकंडक्टर यूनिट की स्थापना हो, या रैपिड रेल का शुभारंभ, हर मौके पर सरकार ने अपने विकास कार्यों को प्रमुखता से दिखाया है।

विपक्ष पर तीखे हमले: इन आयोजनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर भी जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कांग्रेस के व्यवहार की आलोचना की और यूपी में योगी सरकार के कामकाज की तारीफ की। यह रणनीति विपक्षी दलों को कमजोर करने और अपने समर्थकों को एकजुट करने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है।

विकास और सियासत का संतुलन: सरकार विकास के मोर्चे पर अपनी उपलब्धियों को भुनाने के साथ-साथ चुनावी माहौल को भी अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है। बड़े प्रोजेक्ट्स के लोकार्पण और निवेश के बड़े आयोजनों के जरिए जनता को विकास का भरोसा दिलाया जा रहा है, वहीं सियासी संदेशों के जरिए विपक्षी दलों पर बढ़त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यह एक साथ विकास और सियासत को साधने की रणनीति का हिस्सा है।