कानपुर में पुलिस 600 से 700 खातों पर नजर रख रही है। इन खातों से 1600 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है। पुलिस को जीएसटी चोरी की आशंका है। कई खातों में एपीएमसी और एमएसएमई प्रमाणपत्रों का दुरुपयोग हुआ है। एक बड़े संगठित नेटवर्क के शामिल होने की बात कही जा रही है।
कानपुर में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है। पुलिस ने करीब तीन साल में 68 निजी और सरकारी बैंक खातों से 1600 करोड़ रुपये की नकद निकासी के मामले में जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इस मामले में फर्जी बिलिंग और जीएसटी चोरी की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने कई संदिग्ध खातों की पहचान की है और उनसे जुड़े लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। इस खेल के पीछे एक बड़े संगठित नेटवर्क के काम करने का शक है, और कथित मास्टरमाइंड महफूज अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
शुरुआती जांच में पता चला है कि जिन 54 खातों की पहचान पहले हुई थी, उनमें से ज्यादातर अब बंद हो चुके हैं। क्राइम ब्रांच अब इन सभी खातों से हुए लेनदेन की गहराई से जांच कर रही है। इस जांच के दौरान, पुलिस ने 600 से 700 ऐसे अन्य खातों का भी पता लगाया है, जिनसे कभी न कभी इन मुख्य खातों में पैसे आए या गए हैं। इन सभी संदिग्ध खातों पर अब कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पुलिस ने संबंधित बैंकों से इन खातों के पुराने और हालिया लेनदेन का पूरा ब्योरा मांगा है।पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुछ खातों में एपीएमसी (कृषि उपज विपणन समिति) और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) के प्रमाणपत्र लगाए गए थे। पुलिस को शक है कि इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल फर्जी बिल बनाने और जीएसटी चोरी करने के लिए किया जा रहा था। कुछ खातों में तो 100 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का लेनदेन हुआ है। इस बड़े खेल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने एसजीएसटी (राज्य वस्तु एवं सेवा कर) और सीजीएसटी (केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर) विभागों को भी संभावित कर चोरी की जानकारी दे दी है। इसके अलावा, अन्य केंद्रीय एजेंसियों को भी इस मामले से अवगत कराया गया है।
पुलिस का मानना है कि इतनी बड़ी रकम का हेरफेर किसी अकेले व्यक्ति का काम नहीं हो सकता। इसके पीछे एक सुनियोजित और संगठित गिरोह का हाथ होने की पूरी आशंका है। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों से पूछताछ भी की है, लेकिन इस पूरे खेल का मुख्य सरगना, महफूज, अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस उसे पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। यह मामला कानपुर में वित्तीय धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है।