लापरवाही के पहियों के नीचे कुचली गईं पांच ज़िंदगियां?

नवभारत टाइम्स

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर एक बस दुर्घटना में पांच लोगों की जान चली गई। इस बस के कई चालान कटे थे और फिटनेस भी नहीं थी। परिवहन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। यदि समय पर कार्रवाई होती तो यह हादसा टाला जा सकता था। कई यात्री घायल हुए हैं। मामले की जांच जारी है।

five deaths under wheels of negligence bus accident on purvanchal expressway raises questions on transport departments functioning
लखनऊ: पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर हुई बस दुर्घटना ने परिवहन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लुधियाना से दरभंगा जा रही एक डबल डेकर बस, जो पहले से ही दो दर्जन से अधिक बार चालान और फिटनेस, परमिट जैसी कई खामियों के बावजूद सड़क पर दौड़ रही थी, पलट गई। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई और 40 से अधिक यात्री घायल हो गए। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि नियमों की अनदेखी और अधिकारियों की लापरवाही के चलते लोगों की जान जोखिम में डाली गई।

सोमवार को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर दोपहर करीब 3:40 बजे, किलोमीटर 11.2 पर, एचआर 55 एएफ 1323 नंबर की डबल डेकर बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस बस में 150 से अधिक यात्री सवार थे। हादसे के बाद, यह सवाल उठ रहा है कि 2023 में जब इस बस के खिलाफ दो दर्जन से ज्यादा चालान हुए थे, जिनमें लखनऊ में दो बार की गई कार्रवाई भी शामिल थी, तब परिवहन विभाग के अधिकारियों ने क्या कदम उठाए? उस समय बस की फिटनेस नहीं थी और परमिट व अन्य जरूरी कागज भी गायब थे।
नियमानुसार, ऐसी गंभीर खामियों वाली बस को तुरंत सीज कर देना चाहिए था और उसके रजिस्ट्रेशन को रद्द करने के लिए संबंधित अथॉरिटी को पत्र भेजना चाहिए था। अगर उस समय कड़ी कार्रवाई हो जाती, तो शायद यह बस दोबारा सड़क पर नहीं उतरती और लोगों की जान बच जाती।

सूत्रों के अनुसार, 2023 में जब बस पकड़ी गई थी, तब उसकी फिटनेस नहीं थी और परमिट जैसे कई कागज भी नहीं थे। ऐसे में, नियम के अनुसार, बस को जब्त कर उसके रजिस्ट्रेशन को रद्द करने के लिए संबंधित अथॉरिटी को रिपोर्ट भेजनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

यह भी पता चला है कि 2023 में लखनऊ में तैनात रहे अधिकारी अब दूसरे जिलों में सेवाएं दे रहे हैं। सवाल यह है कि तब के अधिकारियों ने इस बस के खिलाफ क्या कार्रवाई की? नियमानुसार, जिस जिले में बस रजिस्टर्ड थी, वहां के आरटीओ को बस को ब्लैकलिस्ट करने और रजिस्ट्रेशन रद्द करने के लिए रिपोर्ट भेजनी चाहिए थी।

सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट तैयार तो हो गई थी, लेकिन उसे भेजा ही नहीं गया। इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं, जिनमें 'डग्गामारों के सिंडिकेट' का दबाव भी शामिल है। यह सिंडिकेट अवैध रूप से बसें चलाने वाले लोगों का समूह है, जो नियमों को ताक पर रखकर अपना काम करते हैं। अधिकारियों पर ऐसे सिंडिकेट का दबाव होने की बात कही जा रही है, जिसके कारण वे नियमों के अनुसार कार्रवाई नहीं कर पाते।