स्वास्थ्य मंत्री का दौरा तय नहीं, BK अस्पताल में कर दी बैरिकेडिंग

नवभारत टाइम्स

बीके अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री के आने की अटकलों के बीच दिनभर तैयारियां चलती रहीं। हालांकि, मंत्री का दौरा तय नहीं हुआ। अस्पताल में बैरिकेडिंग कर दी गई, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी हुई। वाहनों को रोका गया और लोगों को पैदल चलना पड़ा। अस्पताल प्रशासन ने अनावश्यक पार्किंग को समस्या बताया।

स्वास्थ्य मंत्री का दौरा तय नहीं, BK अस्पताल में कर दी बैरिकेडिंग
फरीदाबाद के बीके अस्पताल में हार्ट सेंटर के उद्घाटन के लिए स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के आने की अटकलों के बीच दिनभर गहमागहमी का माहौल रहा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने देर शाम तक इसकी पुष्टि नहीं की, जबकि सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा ने कहा कि उनके पास अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। इस बीच, स्वास्थ्य अधिकारी तैयारियों में जुटे रहे, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती को लेकर मीटिंगें हुईं। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, हृदय रोगियों को बेहतर इलाज देने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग भी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर रहा है। सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने अस्पताल का दौरा कर सभी प्रभारियों को व्यवस्थाएं समय पर दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य मंत्री के संभावित दौरे के कारण अस्पताल में दिनभर अफरा-तफरी का माहौल रहा। पूरे दिन साफ-सफाई चलती रही और पार्किंग एरिया में अनावश्यक वाहनों को रोका गया। सुबह से ही अस्पताल के एंट्री गेट पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी, जिससे कई वाहनों को अंदर नहीं जाने दिया गया। दो पुलिसकर्मी भी तैनात किए गए थे। इसके चलते लोगों को अपने वाहन बाहर फुटपाथ पर पार्क करने पड़े। कई ऑटो और कार सवारों को रोका गया, जिससे मरीज और उनके परिवार वालों को परेशानी हुई। उन्हें धूप में पैदल ही अस्पताल के अंदर जाना पड़ा। कई बीमार मरीजों को लाचार हालत में वहीं उतरना पड़ा। वाहनों के रोके जाने से परिसर के मेन गेट पर जाम की स्थिति भी बनी रही। डबुआ से आए विक्रम ने बताया कि वह अपनी बीमार मां को ऑटो से लेकर पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया और बाहर ही पैदल लेकर जाना पड़ा। इसी तरह, लकडपुर से आई सुनीता ने बताया कि उनकी बेटी कई दिनों से बुखार में है, वह ऑटो में आई थी लेकिन उसे भी बाहर ही रोक दिया गया।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अनावश्यक रूप से बाहरी गाड़ियां यहां पार्क हो रही थीं, जिससे परिसर के अंदर आने-जाने वालों को दिक्कत हो रही थी। इस वजह से वाहनों को रोका गया। डॉक्टरों से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती को लेकर भी मीटिंग की गई। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, हृदय रोगियों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग स्तर पर भी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने सिविल अस्पताल का जायजा लिया और सभी विंग के प्रभारियों को समय से पहले अपनी सभी व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। इसके चलते अस्पताल के अंदर गहमागहमी की स्थिति बनी रही।

स्वास्थ्य मंत्री के आने की अटकलों के बीच, अस्पताल में डॉक्टरों से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ तक की तैनाती को लेकर मीटिंगें हुईं। यह सब इसलिए किया जा रहा था ताकि हृदय रोगियों को बेहतर इलाज मिल सके। इसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग भी इस काम में जुटा हुआ है और जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर रहा है। सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने खुद अस्पताल का दौरा किया और सभी विभागों के प्रभारियों को निर्देश दिए कि वे अपनी व्यवस्थाएं समय पर ठीक कर लें। इस वजह से पूरे दिन अस्पताल में काफी हलचल रही।

अस्पताल के अंदर की गहमागहमी के साथ-साथ बाहर भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य मंत्री के संभावित दौरे के कारण सुबह से ही अस्पताल के गेट पर बैरिकेडिंग लगा दी गई थी। कई वाहनों को अंदर जाने से रोक दिया गया और दो पुलिसकर्मी भी तैनात कर दिए गए। लोगों को अपने वाहन बाहर फुटपाथ पर पार्क करने पड़े। इससे मरीजों और उनके परिवार वालों को काफी दिक्कत हुई। उन्हें तेज धूप में पैदल ही अस्पताल के अंदर जाना पड़ा। कई बीमार मरीजों को तो लाचार होकर वहीं उतरना पड़ा। वाहनों के रोके जाने से मेन गेट पर जाम भी लग गया। डबुआ से आए विक्रम ने बताया कि वह अपनी बीमार मां को ऑटो से लाए थे, लेकिन उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया और बाहर से ही पैदल ले जाना पड़ा। लकडपुर से आई सुनीता ने भी ऐसी ही परेशानी बताई।

अस्पताल प्रशासन ने वाहनों को रोकने की वजह बताते हुए कहा कि अनावश्यक रूप से बाहरी गाड़ियां यहां पार्क हो रही थीं, जिससे अंदर आने-जाने वालों को परेशानी हो रही थी। इस वजह से यह कदम उठाया गया। हालांकि, इस व्यवस्था से मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी असुविधा हुई। उन्हें धूप में पैदल चलना पड़ा और कई बीमार लोगों को तो लाचार हालत में वहीं उतरना पड़ा। इससे मेन गेट पर जाम की स्थिति भी पैदा हो गई।