टारगेट चुनना होगा

नवभारत टाइम्स

यात्रा की तरह निवेश में भी लक्ष्य तय करना जरूरी है। इससे आप अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंच सकते हैं। लक्ष्य होने से आप सही जगह निवेश करते हैं और जोखिम को बेहतर ढंग से संभाल पाते हैं। यह आपको वित्तीय दुनिया में भटकने से बचाता है।

set investment goals the first step towards financial success
निवेश के सफर में अक्सर हम मंजिल तय किए बिना ही आगे बढ़ जाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे रेल या हवाई सफर में डेस्टिनेशन पता होता है। फाइनेंस की दुनिया में यह भटकने की एक बड़ी वजह है। जब भी हमारे पास अतिरिक्त पैसा आता है, हम उसे कहीं भी लगा देते हैं, लेकिन यह तय नहीं करते कि उसे निकालना कब है। इस तरह हम बिना किसी लक्ष्य के निवेश करते रहते हैं।

लक्ष्य तय करने से मिलता है जोश, आसान होता है रिस्क मैनेजमेंट
अगर हम निवेश का एक टारगेट तय कर लें, तो इसके कई फायदे हैं। सबसे पहले, यह हमारे अंदर जोश भरता है। दूसरा, इससे रिस्क को मैनेज करना आसान हो जाता है। निवेश के सफर में आने वाले उतार-चढ़ाव का सामना भी हम बेहतर तरीके से कर पाते हैं।

निवेश के तीन बास्केट: समय के हिसाब से बांटें पैसा

लक्ष्य तय करने के लिए हम अपने निवेश को तीन हिस्सों में बांट सकते हैं। पहला बास्केट उन पैसों के लिए है जिनकी जरूरत 5 साल के अंदर हो सकती है। दूसरे बास्केट में 5 से 10 साल के लिए निवेश करें, और तीसरे बास्केट में 10 साल से ज्यादा समय के लिए।

पहले बास्केट में शेयर बाजार का एक्सपोजर (यानी शेयर बाजार में पैसा लगाना) सबसे कम होना चाहिए। दूसरे बास्केट में यह मध्यम हो सकता है, और तीसरे बास्केट में सबसे ज्यादा।

पूंजी बचाना है तो रिस्क न लें

अगर आपको 5 साल के अंदर पैसों की जरूरत पड़ सकती है, तो आपका ध्यान सिर्फ पूंजी बचाने पर होना चाहिए। ऐसे में कोई रिस्क नहीं लिया जा सकता। इसके लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) जैसे सुरक्षित विकल्प बेहतर होते हैं।

मान लीजिए, आपको पता है कि 7 साल बाद घर में शादी है। तो आपको पांचवें साल से ही शेयर बाजार में लगाया हुआ पैसा निकालना शुरू कर देना चाहिए। इसी तरह, अगर 20 साल बाद रिटायरमेंट के लिए 5 करोड़ रुपये चाहिए, तो समय नजदीक आने पर इक्विटी (शेयर बाजार) में निवेश धीरे-धीरे कम करते जाना चाहिए।

लक्ष्य न होने पर हो सकता है बड़ा नुकसान

अगर लक्ष्य तय न हो, तो हमें यह पता ही नहीं चलता कि कितना पैसा बचाना है। हो सकता है कि आपने सारा पैसा शेयर बाजार में लगा दिया हो। अब अगर अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए और उस समय बाजार की हालत खराब हो, तो आपको नुकसान उठाकर ही पैसा निकालना पड़ेगा।

कभी-कभी बाजार में गिरावट देखकर डर लगता है और मन करता है कि पैसा निकाल लें। लेकिन अगर आपका लक्ष्य दूर है, तो बीच में कितनी भी गिरावट आए, फर्क नहीं पड़ता। आपको यह समझ आता है कि थोड़े समय की गिरावट आपकी लंबी यात्रा पर असर नहीं डालेगी।

लक्ष्य की ओर बढ़ते रहने का भरोसा देता है सुकून

जब आपको भरोसा हो जाता है कि आप अपने लक्ष्य की दिशा में सही तरीके से काम कर रहे हैं, तब बीच में अगर अतिरिक्त आय होती है, तो आप अपनी मर्जी से कहीं भी खर्च कर सकते हैं। जब हम भविष्य की योजना बनाते हैं, तो महंगाई का भी ध्यान रखते हैं। अगर तय मंजिल के हिसाब से निवेश किया जाए, तो टैक्स पर भी इसके अलग-अलग असर होते हैं।

निवेश का मतलब सिर्फ पैसा लगाना नहीं है, बल्कि एक मंजिल तय करके उस दिशा में आगे बढ़ना है। यह हमें न सिर्फ वित्तीय सुरक्षा देता है, बल्कि मानसिक सुकून भी। इसलिए, आज ही अपने निवेश का लक्ष्य तय करें और एक सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं।