किसे है ब्रेस्ट कैंसर का ज्यादा खतरा, मोबाइल ऐप बताएगा

नवभारत टाइम्स

टाटा अस्पताल के वैज्ञानिक एक नया मोबाइल ऐप बना रहे हैं। यह ऐप बताएगा कि किसे ब्रेस्ट कैंसर का खतरा ज्यादा है। ऐप में उम्र, बीएमआई और जीवनशैली जैसी जानकारी भरनी होगी। इससे ज्यादा जोखिम वाले लोगों की समय पर जांच हो सकेगी। यह ऐप नवंबर-दिसंबर तक लॉन्च हो सकता है। यह पूरी तरह मुफ्त होगा और जानकारी सुरक्षित रहेगी।

किसे है ब्रेस्ट कैंसर का ज्यादा खतरा, मोबाइल ऐप बताएगा
मुंबई: देश में कैंसर के बढ़ते मामलों और सीमित स्वास्थ्य संसाधनों को देखते हुए, टाटा अस्पताल के वैज्ञानिक एक ऐसा मोबाइल ऐप तैयार कर रहे हैं जो लोगों को बताएगा कि उन्हें कैंसर का खतरा कितना है। यह ऐप, जो खास तौर पर ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम का आकलन करेगा, नवंबर-दिसंबर तक लॉन्च होने की उम्मीद है। इसका मुख्य उद्देश्य उन लोगों की पहचान करना है जिन्हें कैंसर का अधिक खतरा है, ताकि उनकी समय पर स्क्रीनिंग की जा सके।

टाटा अस्पताल के सेंटर फॉर कैंसर एपिडिमियोलॉजी के निदेशक डॉ. राजेश दीक्षित ने बताया कि भारत जैसे विशाल देश में हर किसी की कैंसर स्क्रीनिंग करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, "भारत जैसे देश में पूरी आबादी की कैंसर स्क्रीनिंग करना संभव नहीं है, क्योंकि जनसंख्या बहुत बड़ी है और संसाधन सीमित हैं।" इसलिए, सबसे अच्छा तरीका यह है कि पहले उन लोगों को पहचाना जाए जिन्हें कैंसर का खतरा ज्यादा है।
यह ऐप एक स्टैटिस्टिकल मॉडल का उपयोग करेगा। यह मॉडल व्यक्ति की उम्र, बॉडी मास इंडेक्स (BMI), बच्चों की संख्या, मेनोपॉज की स्थिति, हिप-वेस्ट रेशियो और जीवनशैली से जुड़े अन्य कारकों जैसी जानकारी के आधार पर कैंसर होने की संभावना का आकलन करेगा। उपयोगकर्ता को यह सारी जानकारी ऐप में भरनी होगी।

डॉ. दीक्षित ने यह भी स्पष्ट किया कि यह ऐप पूरी तरह से मुफ्त होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें भरी गई व्यक्तिगत जानकारी किसी सर्वर पर स्टोर नहीं की जाएगी। यह जानकारी केवल उपयोगकर्ता के मोबाइल फोन में ही सुरक्षित रहेगी। यह ऐप सरकारों के लिए भी बहुत उपयोगी साबित हो सकता है, क्योंकि यह उन्हें जोखिम वाले लोगों की पहचान करने में मदद करेगा।

इस ऐप का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों को ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक है, वे समय रहते अपनी जांच करवा सकें। इससे बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकेगा, जिससे इलाज आसान और सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो देश में कैंसर के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेगा।