Crores Gst Scam Fake Firms Revealed Using Businessmans Documents Case Registered
कारोबारी के डॉक्युमेंट इस्तेमाल कर करोड़ों का GST घोटाला, केस
नवभारत टाइम्स•
गुड़गांव में एक बड़ा जीएसटी घोटाला सामने आया है। एक कारोबारी के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी फर्म बनाई गईं। इन फर्मों से करोड़ों का कारोबार कर टैक्स चोरी की गई। जीएसटी विभाग ने पीड़ित कारोबारी को 90 लाख से अधिक का नोटिस जारी किया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गुड़गांव साइबर सिटी में एक बड़े पहचान चोरी और दस्तावेज़ों के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। सोहना के एक व्यापारी दीपक यादव ने आरोप लगाया है कि जालसाजों ने उनके दस्तावेज़ों का इस्तेमाल करके फर्जी कंपनियाँ बनाईं और करोड़ों के लेन-देन किए, जिससे टैक्स चोरी भी हुई। अब जीएसटी विभाग ने उन्हें 90 लाख रुपये से ज़्यादा का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पुलिस ने व्यापारी की शिकायत पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब दीपक यादव को 3 मार्च 2020 को सीजीएसटी, गुड़गांव के ऑफिस से एक नोटिस मिला। इस नोटिस में बालाजी ट्रेडिंग कंपनी नाम की एक फर्म का ज़िक्र था, जिसका मालिक दीपक को बताया गया था और एक जीएसटीआईएन नंबर भी दिया गया था। फर्म का पता सोहना बताया गया था। दीपक ने तुरंत 11 मार्च 2020 को जवाब देकर साफ किया कि इस कंपनी से उनका कोई लेना-देना नहीं है।लेकिन उनकी मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। दिसंबर 2020 में जब दीपक अपनी फर्म का जीएसटी रिटर्न भर रहे थे, तब उन्हें पता चला कि उनके नाम पर आहूजा इम्पेक्स, मंगोलपुरी, नई दिल्ली नाम की एक और फर्जी फर्म चलाई जा रही है। यह सब उनके दस्तावेज़ों के गलत इस्तेमाल से हुआ था। इस खुलासे के बाद, दीपक ने दिसंबर 2020 में जीएसटी जॉइंट कमिश्नर (वेस्ट) को शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद जनवरी 2021 में उन्होंने जीएसटी कमिश्नर, गुड़गांव को भी इस मामले की जानकारी दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, 12 सितंबर 2025 को दीपक को एक समन मिला। इसमें उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराने और 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2025 तक की बिक्री-खरीद का पूरा डेटा और बैंक स्टेटमेंट जमा करने के लिए कहा गया था। दीपक यादव ने अपना बयान दर्ज कराते हुए कहा कि कुछ धोखेबाज़ों ने उनके दस्तावेज़ों और पहचान का गलत इस्तेमाल करके उनके नाम पर ये फर्जी कंपनियाँ खड़ी की हैं।
यह घटना साइबर अपराध की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करती है, जहाँ जालसाज़ दूसरों की पहचान चुराकर धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं। इस मामले में, दीपक यादव को न केवल मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी, बल्कि उन्हें लाखों रुपये के टैक्स नोटिस का भी सामना करना पड़ रहा है। पुलिस और जीएसटी विभाग की जांच से यह उम्मीद है कि दोषियों को पकड़ा जाएगा और दीपक को न्याय मिलेगा। इस तरह के मामले आम लोगों के लिए एक चेतावनी हैं कि वे अपने व्यक्तिगत दस्तावेज़ों और पहचान की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें।