Itis Dilapidated Buildings Repaired After 3 Years Relief For Students And Staff
3 साल बाद ITI के जर्जर भवन हो रहे दुरुस्त
नवभारत टाइम्स•
गुड़गांव के महरौली रोड स्थित महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के जर्जर भवनों की मरम्मत का कार्य शुरू हो गया है। करीब तीन साल से खराब हालत में पड़े इन भवनों पर साढ़े 15 लाख रुपये खर्च होंगे। पीडब्ल्यूडी द्वारा मरम्मत कार्य किया जा रहा है। इससे छात्राओं और स्टाफ को राहत मिलेगी।
गुड़गांव शहर के महरौली रोड पर स्थित महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) के जर्जर भवनों की करीब तीन साल बाद सुध ली गई है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने साढ़े 15 लाख रुपये की लागत से मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब संस्थान के कई कमरे और बिल्डिंग के हिस्से लंबे समय से खराब हालत में थे, जिससे छात्राओं और स्टाफ को काफी परेशानी हो रही थी।
संस्थान के स्टोर रूम और उससे सटे तीन कमरों की हालत बेहद खस्ता थी। दीवारों में दरारें आ गई थीं और छत टपकने के कारण कमरों में सीलन भर गई थी। बारिश के मौसम में तो स्थिति और भी बदतर हो जाती थी। खिड़की-दरवाजे भी खराब हो चुके थे और लोहे के सरियों में जंग लगने लगा था। यह भवन लगभग 65 साल पुराना है और कई सालों से इसकी मरम्मत या नवीनीकरण नहीं हुआ था, जिसके कारण यह दुर्दशा हुई। अब पीडब्ल्यूडी विभाग ने इन कमरों की खिड़कियों को बदल दिया है, बाहरी हिस्से में टाइल्स लगाई जा रही हैं और छत की भी मरम्मत की जा रही है।इन जर्जर कमरों में रखा जरूरी सामान भी खराब हो गया था। आईटीआई के चार कमरे पूरी तरह से जर्जर हो चुके थे। एक स्टोर रूम में पुराना रिकॉर्ड रखा था, जो सीलन के कारण खराब हो गया। एक कमरे में कॉस्मेटोलॉजी ट्रेड की कक्षाएं चलती थीं और उसमें रखा सामान भी बर्बाद हो गया। बाकी दो कमरों में रखे फर्नीचर और अन्य सामानों को भी नुकसान पहुंचा था। यहां तक कि फाइलें भी खराब हो गईं। हाल ही में, उच्च अधिकारियों ने आईटीआई की फिटनेस की जांच की थी, जिसके बाद यह मरम्मत कार्य शुरू हुआ है।
यह मरम्मत कार्य छात्राओं और स्टाफ के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अब वे सुरक्षित और बेहतर माहौल में अपनी पढ़ाई और काम कर पाएंगे। संस्थान के जर्जर भवनों की समस्या को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था, लेकिन अब इस पर ध्यान दिया गया है। साढ़े 15 लाख रुपये की लागत से होने वाले इस काम से संस्थान की सूरत बदल जाएगी।
यह घटना दर्शाती है कि सरकारी संस्थानों के रखरखाव में लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। समय पर मरम्मत न होने से न केवल संपत्ति का नुकसान होता है, बल्कि वहां काम करने वाले लोगों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे संस्थानों के रखरखाव पर अधिक ध्यान दिया जाएगा ताकि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।