13 करोड़ के CSR फंड से बढ़ेंगी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं

नवभारत टाइम्स

गाजियाबाद जिला प्रशासन को सीएसआर फंड के तहत 13.4 करोड़ रुपये मिले हैं। यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण के विकास में खर्च होगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में सबसे अधिक 8 करोड़ रुपये का उपयोग जिला अस्पताल में महंगी जांच मशीनें खरीदने में किया जाएगा। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स ने स्वास्थ्य के लिए 6 करोड़ रुपये दिए हैं।

13 crore csr fund to expand education and health facilities in ghaziabad
गाजियाबाद को विकसित करने के लिए जिला प्रशासन ने सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के तहत देश भर की नामी कंपनियों के साथ मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है। रविवार को कौशांबी के एक होटल में आयोजित गाजियाबाद सीएसआर एवं सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव में 25 से अधिक कंपनियों ने हिस्सा लिया। इन कंपनियों ने सीएसआर फंड के तहत गाजियाबाद के विकास के लिए 13.4 करोड़ रुपये देने की सहमति जताई है। इस फंड का इस्तेमाल अगले एक साल में शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए किया जाएगा। सबसे ज्यादा ध्यान स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर दिया जाएगा, जिसके लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स की ओर से 6 करोड़ रुपये मिले हैं।

कॉन्क्लेव में जिला प्रशासन और कंपनियों के बीच कई एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर भी हुए। सीडीओ अभिनव गोपाल ने बताया कि इस कॉन्क्लेव से कुल 13.4 करोड़ रुपये का फंड मिला है। इस पैसे से गाजियाबाद में शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में काम किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम होगा। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 6 करोड़ रुपये भारत इलेक्ट्रॉनिक्स की तरफ से मिले हैं। कुल मिलाकर स्वास्थ्य के लिए 8 करोड़ रुपये मिले हैं।
इस फंड का इस्तेमाल जिला अस्पताल में महंगी जांच मशीनें खरीदने के लिए किया जाएगा। बाकी का पैसा पर्यावरण, शिक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में खर्च होगा। यह फंड एचडीएफसी, डीआरडीओ, आईओसीएल, आईटीसी, डाबर, एचपीसीएल, बीपीसीएल जैसी बड़ी कंपनियों से मिला है। इन कंपनियों ने गाजियाबाद के विकास में अपना योगदान देने का वादा किया है।

सीएसआर का मतलब है कि बड़ी कंपनियां अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा समाज की भलाई के कामों में लगाती हैं। इस कॉन्क्लेव का मकसद यही था कि कंपनियां गाजियाबाद के विकास में कैसे मदद कर सकती हैं, इस पर चर्चा हो। कंपनियों ने अपनी रुचि के हिसाब से अलग-अलग क्षेत्रों में फंड देने की बात कही। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे ज्यादा फंड मिलने से यह साफ है कि जिला प्रशासन और कंपनियों का ध्यान लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर है।