बच्चे बनेंगे संपादक, निकालेंगे अपना अखबार

नवभारत टाइम्स

लखनऊ में 13 मार्च से पुस्तक मेला लगने जा रहा है। इस बार मेले में बच्चे अपना अखबार निकालेंगे। वे पत्रकारिता सीखेंगे और मेले की रिपोर्टिंग करेंगे। मेले में कला, राष्ट्रभक्ति और सेहत से जुड़े कार्यक्रम भी होंगे। अवधी व्यंजनों का भी आनंद मिलेगा। यह मेला पाठकों को नई किताबों से जोड़ेगा।

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लखनऊ में 13 मार्च से शुरू हो रहा है ' लखनऊ पुस्तक मेला ', जो 'विकसित भारत-विकसित प्रदेश' की थीम पर आधारित है। यह 10 दिवसीय आयोजन पाठकों को नई किताबों से जोड़ने के साथ-साथ बच्चों को पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों का व्यावहारिक ज्ञान भी देगा। मेले में 'बच्चों का अपना अखबार' जैसा अनूठा प्रयोग होगा, जहाँ बच्चे पेशेवर पत्रकारों के मार्गदर्शन में रिपोर्टिंग, विज्ञापन डिजाइनिंग और संपादन कर अपना अखबार निकालेंगे। इसके अलावा, 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने पर कलात्मक प्रदर्शन, मुफ्त नेत्र परीक्षण शिविर, 'ब्लाइंड वॉक' और 'अवधी व्यंजन उत्सव' भी मेले का हिस्सा होंगे।

नवाबों के शहर लखनऊ में अदब और किताबों का एक बड़ा उत्सव, 'लखनऊ पुस्तक मेला', 13 मार्च से शुरू होने जा रहा है। यह मेला रवींद्रालय के मुख्य लॉन में आयोजित होगा और इसका मुख्य विषय 'विकसित भारत-विकसित प्रदेश' है। यह 10 दिन तक चलने वाला मेला सिर्फ़ किताबों के शौकीनों को ही नहीं, बल्कि बच्चों को भी बहुत कुछ सिखाएगा। बच्चे यहाँ पत्रकारिता की बारीकियां सीखेंगे और समाज से जुड़े मुद्दों को भी समझेंगे।
इस बार मेले का सबसे खास आकर्षण 'बच्चों का अपना अखबार' होगा। आयोजक मनोज सिंह चंदेल ने बताया कि छुट्टियों के दौरान बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ाने के लिए यह एक बेहतरीन मौका है। स्कूल के कुछ चुने हुए बच्चों को पत्रकारिता के बारे में सिखाया जाएगा। बड़े पत्रकार उन्हें गाइड करेंगे। ये बच्चे खुद मेले की खबरें लिखेंगे, विज्ञापनों को डिज़ाइन करेंगे और खबरों को एडिट करेंगे। फिर वे अपना खुद का अखबार छापेंगे। अगर कोई बच्चा आगे चलकर पत्रकार बनना चाहता है, तो यह मेला उसके लिए एक शानदार 'करियर गाइड' का काम करेगा।

कला के क्षेत्र में भी एक खास आयोजन होगा। कला गुरु भूपेंद्र अस्थाना के निर्देशन में 'वंदे मातरम्' के 150 साल पूरे होने के मौके पर एक बड़ी कला प्रदर्शनी लगेगी। युवा कलाकार मेले की जगह पर ही 15 फीट लंबे कैनवस पर देश भक्ति की भावना को दर्शाने वाली पेंटिंग बनाएंगे।

मेले में समाज से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाएगा। यहाँ एक मुफ्त नेत्र परीक्षण शिविर लगाया जाएगा। आजकल मोबाइल और कंप्यूटर के ज़्यादा इस्तेमाल से आँखों पर बुरा असर पड़ रहा है। इसे समझाने के लिए 'ब्लाइंड वॉक' का आयोजन होगा। इसमें बच्चों और युवाओं को यह महसूस कराया जाएगा कि अगर उनकी आँखों की रोशनी चली जाए तो जीवन कितना मुश्किल हो जाता है। इससे वे नेत्रदान के महत्व को समझेंगे।

किताबों के साथ-साथ खाने-पीने का भी खास इंतज़ाम होगा। मेला निदेशक आकर्ष चंदेल और ज्योति किरन रतन ने बताया कि यहाँ 'अवधी व्यंजन उत्सव' भी मनाया जाएगा। इसमें घर की महिलाओं द्वारा बनाए गए पारंपरिक अवधी खाने का स्वाद लेने का मौका मिलेगा। यह मेला ज्ञान, कला, स्वास्थ्य और स्वाद का एक अनूठा संगम होगा।