युद्ध के चलते सप्लाई चेन टूटी डेढ़ गुना तक महंगे हुए खिलौने

नवभारत टाइम्स

ईरान और इजरायल के युद्ध ने भारतीय खिलौना उद्योग को गहरा झटका दिया है। कच्चे माल की किल्लत से उत्पादन ठप हो गया है और निर्यात ऑर्डर रद्द हो रहे हैं। पैकिंग सामग्री महंगी होने से खिलौनों की कीमतें 40 से 50 फीसदी बढ़ गई हैं। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए खिलौने खरीदना मुश्किल हो गया है।

toy supply chain broken due to war prices increased 15 times industry in crisis
ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर भारत के खिलौना उद्योग पर भी पड़ रहा है। इस युद्ध की वजह से कच्चे माल की कमी हो गई है, जिससे उत्पादन ठप हो गया है और निर्यात के ऑर्डर भी रद्द हो रहे हैं। इससे व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

भारत के खिलौना बाजार और मैन्युफैक्चरिंग हब में सन्नाटा छा गया है। वैश्विक अस्थिरता और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव ने भारतीय टॉय इंडस्ट्री की कमर तोड़ दी है। प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल उद्योग के बाधित होने से कच्चे माल की भारी किल्लत हो गई है। इस वजह से न केवल उत्पादन रुक गया है, बल्कि करोड़ों रुपये के निर्यात ऑर्डर भी रद्द हो रहे हैं। इस मुश्किल स्थिति ने व्यापारियों के सामने अस्तित्व का संकट पैदा कर दिया है।
द टॉय असोसिएशन ऑफ इंडिया के जनरल सेक्रेटरी तरुण चेतवानी ने चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले ट्रम्प टैरिफ के बाद भारतीय खिलौना उद्योग ने वैश्विक बाजार में अपनी जगह बनाई थी। लेकिन मौजूदा युद्ध ने सब कुछ बर्बाद कर दिया है। उन्होंने कहा कि करीब 60 से 70 फीसदी छोटी और मध्यम खिलौना बनाने वाली कंपनियां बंद होने की कगार पर हैं।

युद्ध के कारण प्लास्टिक के दाने (plastic granules) नहीं मिल पा रहे हैं। इससे पैकिंग सामग्री, जैसे डिब्बे और फिल्म, डेढ़ गुना तक महंगी हो गई है। इसके अलावा, बड़े फाइबर पैकेजिंग (major fiber packaging) के किराए में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। इन सब वजहों से उत्पादन लागत इतनी बढ़ गई है कि खिलौनों की कीमतें आसमान छू रही हैं। नतीजा यह है कि देसी और विदेशी खरीदार अब भारतीय बाजार से मुंह मोड़ रहे हैं।

खिलौना व्यापारी पवन अग्रवाल के अनुसार, ईरान और इजरायल के बीच युद्ध ने खाड़ी देशों की सप्लाई चेन (supply chain) को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। युद्ध की वजह से समुद्री रास्तों से सामान भेजने (लॉजिस्टिक्स) में भी दिक्कतें आ रही हैं। इससे प्लास्टिक और अन्य जरूरी सामानों की उपलब्धता खत्म हो गई है। अगर युद्ध की स्थिति जल्द ठीक नहीं हुई, तो आने वाले समय में भारत से खिलौनों का निर्यात पूरी तरह बंद हो सकता है।

इस वैश्विक संकट का असर सिर्फ व्यापारियों पर ही नहीं है। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण बच्चों के खिलौनों के दाम बाजार में 40 से 50 फीसदी तक बढ़ गए हैं। मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए अब अपने बच्चों की पसंद के खिलौने खरीदना मुश्किल हो गया है।

खिलौना उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इस मुश्किल समय में निर्यातकों के लिए खास राहत पैकेज (relief package) और लॉजिस्टिक्स (logistics) में मदद देनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह उद्योग दशकों पीछे चला जाएगा। कच्चे माल की कमी और बढ़ी हुई लागत के कारण खिलौना उद्योग एक बड़े संकट से गुजर रहा है। यह स्थिति तब आई है जब उद्योग ने हाल ही में वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की थी। अब सरकार की मदद के बिना इस उद्योग का भविष्य अनिश्चित लग रहा है।