अवैध जींस फैक्ट्रियां यमुना को कर रहीं मैला, प्रशासन मौन

नवभारत टाइम्स

फरीदाबाद की अवैध जींस फैक्ट्रियां यमुना नदी को जहरीला बना रही हैं। गौंछी ड्रेन और बुढिया नाला यमुना को दूषित करने का मुख्य जरिया बन गए हैं। इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला रसायन पानी को काला कर रहा है। प्रशासन इन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। सरकार ने निगरानी के आदेश दिए हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति चिंताजनक है।

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फरीदाबाद में यमुना नदी को बचाने के सरकारी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। शहर की गौंछी ड्रेन और बुढिया नाला यमुना को ज़हरीला बनाने का सबसे बड़ा कारण बन गए हैं। इन नालों में साफ पानी की जगह अवैध जींस और डाइंग फैक्ट्रियों का गंदा, केमिकल वाला पानी बह रहा है, जो यमुना को काले ज़हर में बदल रहा है। प्रशासन इन अवैध फैक्ट्रियों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

सरकार ने यमुना को बचाने के लिए कमर कसी है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है। यमुना में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने हाल ही में गौंछी ड्रेन और बुढिया नाले की खास निगरानी का ज़िम्मा दो विभागों को सौंपा है। यह पूरी निगरानी डिविजनल कमिश्नर की अध्यक्षता में बनी एक टीम करेगी। इस आदेश के मुताबिक, इन विभागों को हर महीने इन नालों की हालत और प्रदूषण के स्तर पर रिपोर्ट देनी होगी। लेकिन इन सबके बीच, अवैध फैक्ट्री चलाने वाले बेखौफ हैं।
शहर के रिहायशी और गैर-औद्योगिक इलाकों में कई अवैध जींस बनाने वाली फैक्ट्रियां चल रही हैं। जींस को धोने और रंगने (Dyeing) में बहुत सारे केमिकल और रंग इस्तेमाल होते हैं। नियमों के हिसाब से, इस गंदे पानी को एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) में साफ करना ज़रूरी है। ETP एक ऐसी जगह है जहाँ गंदे पानी को साफ किया जाता है। लेकिन, पैसे बचाने के चक्कर में ये फैक्ट्री वाले बिना पानी साफ किए ही गंदा पानी सीधे नालों में बहा देते हैं।

यमुना को बचाने के लिए बनी हरियाणा स्टेट पलूशन कंट्रोल बोर्ड (HSPCB), फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (FMDA) और सिंचाई विभाग के बीच तालमेल की कमी साफ दिख रही है। लोगों का कहना है कि इन अवैध फैक्ट्रियों के बारे में जानकारी होने के बावजूद ये विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। न तो इन फैक्ट्रियों को बंद किया जा रहा है और न ही इनके मालिकों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। अधिकारियों की इसी ढिलाई का फायदा उठाकर प्रदूषण फैलाने वाले लोग खूब फल-फूल रहे हैं।

गौंछी और बुढिया नाला सीधे यमुना नदी में जाकर मिलते हैं। जब तक इन नालों में गिरने वाले ज़हरीले पानी के स्रोत, यानी अवैध फैक्ट्रियों को बंद नहीं किया जाएगा, तब तक यमुना को साफ करने का कोई भी प्रोजेक्ट सफल नहीं हो सकता। डिविजनल कमिश्नर की निगरानी वाली टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन छोटी लेकिन अनगिनत अवैध फैक्ट्रियों पर लगाम कसना होगा। सरकार ने हाल ही में राज्य की 11 ऐसी ड्रेनों की पहचान की है जो यमुना को गंदा कर रही हैं। इनमें से दो फरीदाबाद की हैं। इन ड्रेनों की निगरानी करना और इनमें गिरने वाले गंदे पानी की रिपोर्ट और मॉनिटरिंग करना इन विभागों का काम है। अब देखना यह है कि नई व्यवस्था के बाद इन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई होती है या फिर हर महीने की रिपोर्ट सिर्फ फाइलों में ही सिमट कर रह जाती है।

यह स्थिति यमुना नदी के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रही है। यमुना, जो कभी जीवनदायिनी कहलाती थी, अब औद्योगिक कचरे और ज़हरीले रसायनों के कारण अपनी पहचान खो रही है। फरीदाबाद जैसे शहर में, जहाँ औद्योगिक गतिविधियाँ तेज़ हैं, वहाँ इस तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है। लोगों को पीने के पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है और जलीय जीवन भी खतरे में पड़ सकता है।

अवैध फैक्ट्रियों का यह 'काला कारोबार' सिर्फ पर्यावरण को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहा, बल्कि यह सरकारी नियमों की भी धज्जियां उड़ा रहा है। जब तक प्रशासन इन पर सख्ती से कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक यमुना को बचाना एक दिवास्वप्न ही रहेगा। यह ज़रूरी है कि जिम्मेदार विभाग अपनी जिम्मेदारियों को समझें और तुरंत कार्रवाई करें।

यह भी समझना ज़रूरी है कि ETP का काम क्या होता है। ETP यानी एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, एक ऐसी मशीन या प्लांट होता है जो फैक्ट्रियों से निकलने वाले गंदे पानी को साफ करता है। इसमें कई तरह की प्रक्रियाएं होती हैं जिनसे पानी में मौजूद हानिकारक तत्व निकल जाते हैं और पानी साफ हो जाता है। लेकिन, अवैध फैक्ट्रियां इस ज़रूरी प्रक्रिया को अपनाए बिना ही पानी को सीधे नदी-नालों में बहा देती हैं।

यह पूरा मामला एक गंभीर चिंता का विषय है और इस पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यमुना नदी का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।