No Change In Compartment Rule Exam System Remains Same Despite Seven Subjects
कम्पार्टमेंट नियम में कोई बदलाव नहीं
नवभारत टाइम्स•
कम्पार्टमेंट परीक्षा के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। एक या दो विषयों में फेल होने वाले छात्र कम्पार्टमेंट श्रेणी में ही रहेंगे। कौशल विषय के अंक से फेल हुए विषयों को समायोजित किया जा सकेगा। इससे शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। छात्रों को बहुभाषी शिक्षा का लाभ मिलेगा। परीक्षा प्रणाली अधिक व्यापक और संतुलित होगी।
बोर्ड ने परीक्षा नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिससे अब सात विषयों की परीक्षा होगी। लेकिन कम्पार्टमेंट और सप्लीमेंट्री परीक्षा के नियम पहले जैसे ही रहेंगे। जो छात्र एक या दो विषयों में फेल होंगे, वे कम्पार्टमेंट श्रेणी में ही गिने जाएंगे। अच्छी खबर यह है कि कौशल विषय का फायदा छात्रों को पहले की तरह मिलता रहेगा। अगर कोई छात्र गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान जैसे मुख्य विषयों में फेल हो जाता है, तो उसके कौशल विषय के अंक उस कमी को पूरा करने में मदद करेंगे। इस नए नियम से शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। छात्रों को कई भाषाओं में पढ़ाई का मौका मिलेगा और परीक्षा का तरीका भी ज्यादा बेहतर और संतुलित हो जाएगा। दिव्यांग छात्रों को त्रि-भाषा प्रणाली में सिर्फ एक भाषा में छूट मिलेगी। छात्रों को हिंदी, अंग्रेजी और एक तीसरी भाषा में से किन्हीं दो को चुनना होगा।
बोर्ड ने यह साफ कर दिया है कि विषयों की संख्या सात होने के बावजूद, कम्पार्टमेंट और सप्लीमेंट्री परीक्षाओं से जुड़े नियमों में कोई फेरबदल नहीं किया गया है। पहले की तरह ही, अगर कोई छात्र एक या दो विषयों में पास नहीं हो पाता है, तो उसे कम्पार्टमेंट श्रेणी में रखा जाएगा। यह व्यवस्था छात्रों को एक और मौका देने के लिए है।एक और अहम बात यह है कि कौशल विषय का लाभ छात्रों को पहले की तरह ही मिलता रहेगा। इसका मतलब है कि अगर कोई छात्र गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों में फेल हो जाता है, तो उसके कौशल विषय में प्राप्त अंक उस विषय के अंकों के साथ जोड़कर उसकी मदद करेंगे। यह छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है।
इन नए नियमों को लागू करने से शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेगा। इससे छात्रों को बहुभाषी शिक्षा का लाभ मिलेगा, यानी वे एक से अधिक भाषाओं में अपनी पढ़ाई कर सकेंगे। साथ ही, परीक्षा प्रणाली भी पहले से ज्यादा व्यापक और संतुलित हो जाएगी।
दिव्यांग छात्रों के लिए भी एक खास व्यवस्था की गई है। त्रि-भाषा प्रणाली के तहत, उन्हें केवल एक भाषा में छूट मिलेगी। इसका मतलब है कि उन्हें बाकी भाषाओं की परीक्षा देनी होगी। छात्रों को अपनी पसंद के अनुसार हिंदी, अंग्रेजी और एक अन्य भाषा में से किन्हीं दो भाषाओं का चयन करना होगा। यह छात्रों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार भाषा चुनने की आजादी देता है।