‘जो शहर की तहज़ीब से जुड़ा है वही लखनवी’

नवभारत टाइम्स

लखनऊ की तहज़ीब और भविष्य पर कॉल्विन तालुकदार कॉलेज में एक पैनल चर्चा हुई। वक्ताओं ने शहर की विरासत और आने वाले दस वर्षों में इसके बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला। लखनऊ किसी एक समुदाय या पीढ़ी की जागीर नहीं है। नवाब आसफउद्दौला के समय से ही लखनऊ ने हर संस्कृति को अपनाया है।

lucknows culture who owns the city panel discussion on heritage and future
लखनऊ का भविष्य कैसा होगा, इस पर रविवार को कॉल्विन तालुकदार कॉलेज में एक खास पैनल डिस्कशन हुआ। ' लखनऊ का स्वामित्व : हमारे शहर का मालिक कौन है?' विषय पर हुई इस चर्चा में शहर की विरासत और आने वाली चुनौतियों पर बात हुई। इस कार्यक्रम का संचालन कनक रेखा चौहान ने किया।

चर्चा में इज़ाबेला थोबर्न कॉलेज के रिटायर्ड एसोसिएट प्रोफेसर सदा नंद सिंह ने कहा कि आने वाले दस सालों में लखनऊ इतना बदल जाएगा कि हम खुद को वहां अजनबी महसूस कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य के नागरिक धीरे-धीरे आकार ले रहे हैं। ला मार्टिनियर कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल कार्लाइल मैकफारलैंड ने भी शहर के बदलते माहौल पर अपनी बात रखी।
कनक रेखा चौहान ने आगे कहा कि लखनऊ सिर्फ किसी एक समुदाय या पीढ़ी की जागीर नहीं है। उन्होंने कहा, "लखनऊ किसी एक समुदाय या पीढ़ी की जागीर नहीं" है। उन्होंने समझाया कि लखनऊ को यहां के कवियों, शासकों और विद्रोहियों ने मिलकर बनाया है। रूथ चक्रवर्ती ने लखनऊ की मेहमाननवाज़ी का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि नवाब आसफउद्दौला के समय से ही लखनऊ ने हर संस्कृति को अपनाया है।

इस पैनल डिस्कशन का आयोजन आदाब अर्ज़ ग्रुप ने किया था। इसमें शहर के इतिहास और भविष्य को लेकर कई अहम बातें सामने आईं। लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि लखनऊ की पहचान को बनाए रखना बहुत ज़रूरी है।