मोबाइल और जंक फूड बिगाड़ रहा बच्चों का डाइजेशन

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बच्चों की बदलती जीवनशैली उनकी सेहत के लिए खतरा बन गई है। मोबाइल, जंक फूड और कम शारीरिक गतिविधि के कारण बच्चों में कब्ज, एसिडिटी और पेट दर्द जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर जीवनशैली नहीं बदली तो कम उम्र में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

mobile and junk food ruining childrens digestion doctors warning

n दीपाली श्रीवास्तव, गुड़गांव

जिले के बच्चों की बदलती लाइफस्टाइल अब उनकी सेहत के लिए खतरे की घंटी बनती जा रही है। कभी मैदानों में दौड़ने और घर का खाना खाने वाले बच्चे अब मोबाइल स्क्रीन, जंक फूड और बंद कमरों तक सिमट गए हैं, जिसका सीधा असर उनके पेट की सेहत (डाइजेस्टिव हेल्थ) पर दिखने लगा है। डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले 10 साल में बच्चों में कब्ज, एसिडिटी, पेट दर्द, अपच, मोटापा और फैटी लिवर जैसी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में आने वाले हर 10 में से करीब 2 बच्चे किसी न किसी पेट या डाइजेस्टिव समस्या से जूझ रहे हैं। वर्ल्ड डाइजेस्टिव हेल्थ डे पर डॉक्टर्स ने चेतावनी दी कि अगर अभी बच्चों की लाइफस्टाइल नहीं बदली गई, तो कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। आउटडोर एक्टिविटी की कमी, बढ़ता स्क्रीन टाइम, फास्ट फूड और देर रात तक जागने की आदत बच्चों के पाचन तंत्र को तेजी से कमजोर कर रही है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय अरोड़ा ने कहा कि आज के बच्चे शारीरिक गतिविधियों से दूर होते जा रहे हैं और उनका ज्यादातर समय स्क्रीन पर बीत रहा है। इसके साथ ही फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और प्रोसेस्ड फूड उनकी रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बन चुके हैं। देर रात तक जागना और पानी कम पीना भी इसकी वजह है। उन्होंने सलाह दी कि बच्चों को रोज कम से कम एक घंटा आउटडोर एक्टिविटी करनी चाहिए। साथ ही घर का ताजा भोजन, फल, सलाद और फाइबर युक्त डाइट को प्राथमिकता देनी चाहिए। चिंता की बात यह है कि 10 से 12 साल की उम्र में ही कब्ज, एसिडिटी, पेट दर्द, अपच, मोटापा और फैटी लिवर जैसी बीमारियां सामने आने लगी हैं। रोजाना खेलकूद और एक्सरसाइज, घर का ताजा और संतुलित भोजन, स्क्रीन टाइम सीमित करें, पर्याप्त नींद और पानी की मात्रा बढ़ाएं और समय पर खाना खाने की आदत डालें।