प्रदर्शनकारियों को सख्त संदेश देने के लिए दोनों नेता जेल में?

नवभारतटाइम्स.कॉम•
strict message to protesters is jailing leaders the polices strategy
Shanker.Singh

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n नई दिल्ली: स्पेशल एग्जिक्यूटिव मैजिस्ट्रेट (SEM) की भूमिका निभा चुके एक रिटायर्ड एसीपी का कहना है कि प्रिवेंटिव डिटेंशन का मतलब होता है कथित आरोपी के गुस्से को शांत करना। अगर किसी के शांति भंग करने या गंभीर अपराध को अंजाम देने की आशंका होती है तो करीब 12-15 घंटे तक पुलिस लॉकअप में रहने से उसका उबाल ठंडा हो जाता है। इसलिए बतौर SEM वह गिरफ्तार शख्स को निजी मुचलके या श्योरिटी बॉन्ड भरवा कर छोड़ देते थे। कई बार पारिवारिक या पड़ोसियों में बॉन्ड भरने के बावजूद फिर झगड़ा हुआ, तब भी पुलिस की हिरासत की अवधि को काफी मान लिया। हां, आदतन अपराधियों के मामले जरूर सख्ती बरतनी पड़ती है।

आखिर सीजेपी नेता आशुतोष रांका और सौरव दास के मामले में पुलिस की रणनीति क्या है? रिटायर्ड एसीपी कहते हैं कि दिपके के साथ एयरपोर्ट से हिरासत में लेने के बाद गिरफ्तारी होने पर दोनों ने 11 अक्टूबर को पीस बॉन्ड भरा था। पुलिस कमिश्नर ने इसी दिन जंतर मंतर को डिनोटिफाई कर धरने-प्रदर्शन पर पाबंदी का स्टैडिंग ऑर्डर जारी किया। दास और रांका ने 13 अक्टूबर को सीजेपी के अन्य 12 मेंबरों के साथ वहां घुस कर सिस्टम को चुनौती दी। कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थाने में दर्ज दोनों केसों में जमानती धाराएं थीं। पुलिस ने न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के लिए BNSS की धारा 126/170 का इस्तेमाल किया, ताकि कानून तोड़ने वालों को कड़ा संदेश दिया जा सके।

पुलिस के एक अधिकारी कहते हैं कि नीट परीक्षा में धांधली के प्रोटेस्ट में सपोर्ट अलग था। SIR को लेकर आंदोलन के ऐलान को वैसा समर्थन नहीं मिला। यही वजह है कि रांका और दास के पांच दिन तक न्यायिक हिरासत के दौरान मंदिर मार्ग स्थित SEM कोर्ट में हुई सुनवाइयों या पेशी के दौरान भी ज्यादा भीड़ नहीं जुटी। जांच अधिकारी ने सोमवार को एसईएम कोर्ट में 11 अक्टूबर के बॉन्ड के उल्लंघन, सोशल मीडिया के जरिए 163 लागू होने के बावजूद जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए बुलाने और SEM को गुमनाम धमकी भरे मेसेज आने को संभावित खतरे और शांति भंग करने की आशंका के तौर पर रखा। नए SEM ने इसी आधार पर दो दिन हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया।

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