Dengue malaria In Pregnancy Life threatening For Both Mother And Child Know Preventive Measures
गर्भावस्था में डेंगू-मलेरिया, यानी जच्चा-बच्चा दोनों के लिए खतरा
नवभारतटाइम्स.कॉम•
nNBT न्यूज, लखनऊ
शहर में डेंगू और मलेरिया का खतरा बढ़ने के साथ गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इन बीमारियों का असर मां के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है। तेज बुखार से बच्चे की जान को खतरा रहता है, जबकि मलेरिया में बच्चे का विकास प्रभावित होता है। इससे कम वजन और समय से पहले डिलिवरी का खतरा भी रहता है। क्वीन मेरी अस्पताल की विभागाध्यक्ष प्रो. अंजू अग्रवाल ने बताया कि गर्भावस्था में डेंगू और मलेरिया होने पर मां और बच्चे, दोनों की सेहत पर नजर रखना जरूरी है।प्रो. अंजू के मुताबिक डिलिवरी के आसपास डेंगू होने पर विशेष सावधानी जरूरी होती है। प्लेटलेट्स कम होने से डिलिवरी के दौरान अधिक ब्लीडिंग का भी खतरा रहता है। गंभीर स्थिति में प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। मलेरिया में रेड ब्लड सेल (RBC) टूटने से गर्भवतियों का हीमोग्लोबिन कम होता है और गंभीर एनीमिया की समस्या बढ़ती है। मलेरिया का असर गर्भनाल (प्लेसेंटा) के जरिए बच्चे तक पहुंच सकता है, जिससे बच्चे का विकास रुकने, जन्म के समय वजन कम रहने और समय से पहले जन्म का खतरा पैदा हो जाता है। अत्यधिक गंभीर मामलों में गर्भ में ही बच्चे की मौत का भी खतरा रहता है। इसके अलावा, फाल्सीपेरम मलेरिया की स्थिति में मां के मस्तिष्क पर असर पड़ने, दौरे आने और बेहोशी या कोमा जैसी गंभीर समस्याएं होने की भी आशंका रहती है।
खुद न लें बुखार की दवा : प्रो. अंजू के मुताबिक डेंगू या मलेरिया में बुखार आने पर गर्भवती महिलाएं बिना डॉक्टर की सलाह के पैरासिटामोल न लें। इससे लिवर को नुकसान पहुंच सकता है। गर्भवती महिलाओं को मच्छरदानी का इस्तेमाल करना चाहिए।