Good Company The Surefire Way To Improve Nature And Behavior
अच्छी संगति में सुधर जाते हैं स्वभाव और व्यवहार
Contributed by: मुनि जयकुमार|नवभारतटाइम्स.कॉम•
संगत सदा सज्जन लोगों की करनी चाहिए। उत्तम गुणों से संपन्न व्यक्तियों का साथ हमारे जीवन को सही दिशा देता है। मनुष्य के व्यक्तित्व, विचार और व्यवहार पर संगति का गहरा प्रभाव पड़ता है। जैसे गर्म लोहे पर पड़ी पानी की बूंद तुरंत नष्ट हो जाती है, कमल के पत्ते पर पड़ी बूंद मोती के समान चमकती है और स्वाति नक्षत्र में सीप के मुंह में गिरी बूंद मोती बन जाती है। ये उदाहरण बताते हैं कि संगति हमारे जीवन को किस तरह प्रभावित करती है।
मनुष्य में अनेक गुण और अवगुण उसके परिवेश से विकसित होते हैं। उत्तम पुरुषों की संगति से अज्ञान दूर होता है, विवेक जागृत होता है, विनम्रता आती है और व्यक्तित्व निखरता है। सज्जनों का साथ मनुष्य को अपनी कमजोरियों को पहचानने और उन्हें दूर करने की प्रेरणा देता है। जब हम अपनी कमियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने का प्रयास करते हैं, तभी जीवन में परिवर्तन संभव होता है।संगति के प्रभाव को समझाने वाली दो तोतों की कथा प्रसिद्ध है। दोनों भाई थे। एक चोरों की बस्ती में पला, जबकि दूसरा संन्यासी के आश्रम में रहा। चोरों की संगति में पला तोता ‘मारो, लूटो और पकड़ो’ जैसी भाषा बोलता था। वहीं आश्रम में पला तोता आने वाले लोगों का स्वागत करते हुए कहता था, ‘स्वागतम्, सुस्वागतम्।’ दोनों का जन्म और पालन-पोषण एक जैसा था, लेकिन संगति ने उनके स्वभाव और व्यवहार को बिल्कुल अलग बना दिया। इसीलिए कहा गया है, ‘तुलसी संगत साधु की, हरे कोटि अपराध।’ सज्जनों और साधुओं की संगति मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। अच्छी संगति हमारी अंतर्निहित क्षमताओं को जागृत करती है और हमें समाज व राष्ट्र के लिए उपयोगी कार्य करने की प्रेरणा देती है।
कहा जाता है कि पारस के स्पर्श से लोहा भी सोना बन जाता है। उसी प्रकार अच्छी संगति से अज्ञानी व्यक्ति भी ज्ञान, विवेक और सद्गुणों से संपन्न बन सकता है। इसलिए जीवन में ऐसे लोगों का साथ चुनें, जिनकी संगति हमें बेहतर मनुष्य बनने की प्रेरणा दे। यही जीवन के वास्तविक आनंद और सार्थकता का मार्ग है।